पहाड़ की सांस्कृतिक धरोहर के ध्वज वाहक थे हीरा सिंह राणा
मशहूर लोक कलाकार को वर्ष 2019 में मिला था उत्तराखंड गौरव सम्मान
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग/गैरसैंण। उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक कलाकार हीरा सिंह राणा का जन्म अल्मोड़ा जिले के डडोली मानिला गांव में 16 सितंबर 1942 को हुआ था। सांस्कृतिक संस्था उत्तराखंड महापरिषद लखनऊ ने उन्हें वर्ष 2019 में उत्तराखंड गौरव के सम्मान से भी नवाजा था। वह पहाड़ की सांस्कृतिक धरोहर के ध्वज वाहक थे।
हीरा सिंह राणा के कुमाऊंनी लोक गीतों की एलबम रंगीली बिंदी, रंगदार मुखडी, सौमनो की चोरा, ढाई बिसी बरस हार्ठ कमाला, आहा रे जमानो आज भी लोग गुनगुनाते हैं। जीवन के अंतिम पड़ाव में हीरा सिंह राणा को दिल्ली सरकार की ओर से गढ़वाली-कुमांउनी, जौनसारी भाषा अकादमी का उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया। उनके गीत त्यर पहाड़, म्यर पहाड़, होय दु:खों को ड्यर पहाड़..., राजनीति ले तोड़ पहाड़, ठेकेदारों ले फोड़ पहाड़, नोनतिनों ले छोड़ पहाड़... हमेशा लोगों की जुबां पर गाए जाते हैं। पहाड़ की समसामयिक दशा को शब्दों में पिरोकर एक सूत्र में बांधने वाले प्रसिद्ध लोक गायक हीरासिंह राणा ने उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान क्रांति गीत लश्का कमर बांधा, हिम्मत का साथ। फिर भ्वला उज्याली होली कां लै रौली राता। य नी होनो, ऊ नी होनो , कै बै के नि हुनो। उनका संदेश सदा उत्तराखंडियों को सदा याद रहेगा।
हीरा सिंह का निधन अपूरणीय क्षति
कर्णप्रयाग/गैरसैंण। उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक कलाकार हीरा सिंह राणा के निधन को साहित्यकारों, पत्रकारों, लेखकों और लोक कलाकारों ने अपूरणीय क्षति बताया। विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी, पूर्व विधायक डॉ. अनसूया प्रसाद मैखुरी, अनिल नौटियाल, राजेंद्र भंडारी, मंत्री प्रसाद नैथानी, रंगकर्मी कांति डिमरी, जितेंद्र कुमार, दिनेश बुग्याली, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी व उत्तराखंड महापरिषद लखनऊ के अध्यक्ष मोहन बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड ने एक महान लोक कलाकार खो दिया है।