आदिबदरी में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं ने स्वास्थ्य सुविधाओें को बेहतर बनाने ?
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अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत आयोजित गोष्ठी में पहाड़ी क्षेत्रों में बालिका शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर खास देने की जरूरत बताई गई। वक्ताओं का कहना था कि पहाड़ के अनेक हिस्सों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। दूरस्थ गांवों में डिग्री कालेज नहीं होने से बालिकाएं उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाती हैं, जबकि स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होने से महिलाएं कई प्रकार की गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाती हैं।
गोष्ठी का शुभारंभ पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य शकुंतला बरमोला ने किया। उन्होंने सरकार की ओर से महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। कहा कि महिलाओं पर घर के कार्यों का अधिक दबाव रहता है, ऐसे में वे अपने स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पाती हैं और उनको गंभीर बीमारियां जकड़ लेती हैं। प्रूडेंट एजूकेशन सेंटर की संचालिका शिवानी थपलियाल ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। इसे सरकारी स्तर पर गांवों में घर-घर जाकर प्रचारित करना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता गीता देवी ने कहा कि शराब के प्रचलन से आपराधिक घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। गांवों और शहरों में शराबखोरों के डर से महिलाओं का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। महिलाएं घरेलू कलह का शिकार हो रही हैं। महिलाओं को शराब के विरोध में एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। ग्राम छिमटा की यशोदा नेगी ने कहा महिलाओं का आत्मनिर्भर होना बहुत जरूरी है। उन्हें व्यवसायिक दृष्टिकोण रखना चाहिए। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से या डेरी उद्योग, मौन पालन, फल प्रसंस्करण व मशरूम उत्पादन से भी महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती है। शांति शाह ने कहा कि महिलाओं को अपने कर्तव्यों की जानकारी तो होती है, लेकिन अपने अधिकारों व महिलाओं से संबंधित संविधान व कानून की जानकारी भी उन्हें रखनी चाहिए। गोष्ठी में प्रियंका, रंजू देवी, लक्ष्मी चौधरी, सोनी शाह आदि ने भी विचार रखे।