इस बार प्रशासन 65वें गौचर मेले को हर मायने में खास बनाने की कवायद करने में जुटा है। मेले की शुरुआत जहां वेबसाइट और लोगो से प्रशासन ने की, वहीं समापन पर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल को आमंत्रित कर इस राजकीय मेले को यादगार बनाने की कोशिश में जुटा है। राज्यपाल 20 नवंबर को मेले का समापन करेंगे।
वर्ष 1943 से शुरू हुआ गौचर मेला आज भव्य रूप ले चुका है। आज भी यहां तत्कालीन परंपरागत वस्तुएं जो विपणन के लिए यहां लाई जाती रही हैं आकर्षण का केंद्र बनी हैं।
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के बाद इस बार मेेले के सरकारी स्टॉलों में स्थानीय उत्पाद भी यहां खूब हैं। यहां मंडुवे का आटा, भंगजीरा, गहत की दाल, फरण, सोयाबीन सहित ऊनी वस्त्रों की भरमार है।
मेलाधिकारी विवेक प्रकाश का कहना है कि मेले की भव्यता के साथ पौराणिकता और स्थानीय उत्पादों के विपणन का जो उद्देश्य रहा है उसे मेले में संजोया गया है।
पहाड़ केे लुप्त होते शिल्प को भी मेले में स्थान में दिया गया है। इस बार मेला समापन के अवसर पर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल केके पाल को आमंत्रण दिया गया है, जिसे महामहिम ने स्वीकार भी किया है। बताया कि 20 नवंबर को मेले का समापन महामहिम करेंगे।