गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा बृहस्पतिवार को उमा देवी मंदिर से वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ और बाल भोग के बाद डिम्मर गांव पहुंची। यहां यात्रा का पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं के भजन-कीर्तनों से गांव का वातावरण भक्तिमय हो गया।
गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा बुधवार को कर्णप्रयाग के उमा देवी मंदिर में रुकी थी। बृहस्पतिवार को उमा देवी मंदिर में मां उमा और गाडू घड़ा की वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने बाल भोग का प्रसाद ग्रहण कर पुण्य अर्जित किया।
इसके बाद गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा ने श्री बदरीनाथ भगवान के डिमरी पुजारियों के गांव डिम्मर के लिए प्रस्थान किया। श्रद्धालुओं ने उमा देवी मंदिर से डिम्मर गांव तक पुष्प वर्षा के साथ यात्रा का भव्य स्वागत किया।
डिम्मर गांव में श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में आचार्यों ने विष्णु शहस्त्रनाम और नामावलियों से गाडृ घड़ा तेल कलश को मंदिर में प्रतिस्थापित किया। मंदिर में गाडू घड़ा तेल कलश की सात मई तक महाभिषेक पूजा की जाएंगी।
डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष सुरेश डिमरी ने बताया कि द्वितीय चरण की यात्रा आठ मई को डिम्मर गांव से प्रस्थान कर रात्रि विश्राम नृसिंह मंदिर जोशीमठ में करेगी। यात्रा 9 मई को योगध्यान मंदिर पांडुकेश्वर में रात्रि विश्राम करेगी। 10 मई को योगध्यान मंदिर पांडुकेश्वर से भगवान उद्धव जी, कुुबेर, गाडू घड़ा तेल कलश, शंकराचार्य की गद्दी, रावल जी सहित सैकड़ों श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंचेंगे।
11 मई को भगवान बदरी विशाल के कपाट खुलने के बाद उद्धव जी और कुबेर जी की प्रतीकात्मक मूर्ति, गाडू घड़ा तेल कलश को मंदिर के गर्भगृह में प्रतिस्थापित किया जाएगा। इस मौके पर उमा देवी मंदिर के आचार्य राजेंद्र पुजारी, रविंद्र पुजारी, दुर्गा प्रसाद डिमरी, राकेश कुमार डिमरी, नरेश चंद्र, दिनेश चंद्र, टीका प्रसाद, अनुज डिमरी और पंकज डिमरी आदि मौजूद थे।