जीआईसी मैदान में शुक्रवार को आयोजित बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण शिविर में 576 लोगों ने पंजीकरण करवाया। शिविर का शुभारंभ स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों में अल्ट्रासाउंड, एक्सरे और अन्य जांचों को निशुल्क करने के लिए सरकार ने कार्ययोजना तैयार कर दी है, जिन स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों का अभाव है, वहां हर माह स्वास्थ्य कैंप लगाया जाएगा।
शिविर में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से राज्य को दिए जाने वाले 3300 करोड़ रुपये की कटौती करने के बावजूद राज्य सरकार ने सीएम स्वास्थ्य बीमा योजना की राशि को 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख पिच्चहत्तर हजार करने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकांश महिलाएं पेड़ों से गिरकर विकलांग हो जाती हैं। उनके लिए सरकार पेंशन योजना चला रही है। उन्होंने राड़खी गांव के दिव्यांग सुरेंद्र कमांडर को व्हील चेयर और कालेश्वर के अजय सिंह को कान की मशीन दी। डिप्टी स्पीकर डा. अनुसूया प्रसाद मैखुरी ने कर्णप्रयाग विधानसभा के दूरस्थ क्षेत्रों में बहुउद्देश्यीय शिविर लगाने की और सीएसची, पीएचसी तथा एएनएम सेंटरों में रिक्त पदों पर तैनाती करने की मांग की। शिविर में 576 लोगों ने विभिन्न विभागों की ओर से संचालित कैंपों में पंजीकरण करवाया। शिविर में 77 दिव्यांगों, आयुर्वेदिक चिकित्सा में 76, होम्योपैथी के 128, वृद्धावस्था पेंशन के 10, दिव्यांग पेंशन के 08, विधवा पेंशन के चार, अटल आवास दो, तीलू रौतेली एक, जन श्री बीमा योजना एक तथा विभिन्न पेंशन योजनाओं के 26 पंजीकरण किए गए। 13 दिव्यांगों को यात्रा कार्ड बांटे गए। इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरि सिंह रावत, डीएम विनोद कुमार सुमन, एसडीएम विवेक प्रकाश, तहसीलदार वीसी पंत, नगर पालिका अध्यक्ष गौचर मुकेश नेगी, दुग्ध संघ अध्यक्ष राजेश्वरी नेगी, जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र सिंह नेगी, ब्लॉक प्रमुख राधा देवी, रेनू नेगी और हरीश सती सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
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क्षेत्र पंचायत प्रमुख ने जताया रोष
क्षेत्र पंचायत प्रमुख कर्णप्रयाग राधा देवी ने बताया कि वे इस विकासखंड की प्रथम नागरिक हैं। लेकिन यहां आयोजित बहुउद्देश्यीय शिविर में उन्हें विचार व्यक्त करने तक का अवसर नहीं दिया गया। कहा कि पूर्व में सिदोली में आयोजित देवराड़ी देवी मेले में सीएम के आगमन पर भी उनको विचार व्यक्त करने से वंचित रखा गया था।