चमोली जनपद के मंडल घाटी में ग्राम पंचायत देवलधार के मवाण तोक के लिए वर्ष 2001 से निर्माणाधीन हाईड्रम योजना का कार्य आज तक पूरा नहीं हो पाया।
इससे यहां ग्रामीणों की करीब ढाई सौ नाली भूमि बंजर पड़ गई है। लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते आज भी हाईड्रम योजना के करीब 25 पाइप क्षेत्र में लावारिस हालत में पड़े हुए हैं।
राज्य गठन के बाद देवलधार गांव के ग्रामीणों के प्रस्ताव पर शासन से मवाण गांव के लिए हाईड्रम योजना स्वीकृत हुई। इसके लिए लघु सिंचाई विभाग को नौ लाख 35 हजार रुपये भी स्वीकृत हुए। ग्रामीणों को उम्मीद जगी कि अब वे अपने खेतों की सिंचाई कर सकेंगे।
योजना पर ठेकेदार की ओर से छह लाख 90 हजार रुपये खर्च किए गए, लेकिन आज तक योजना का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। नदी साइड हाईड्रम मशीनें स्थापित की गई हैं।
हाईड्रम तक पाइप भी बिछाए गए, लेकिन इससे आगे कोई कार्य नहीं हुआ है।
स्थानीय ग्रामीण ओम प्रकाश डिमरी के नेतृत्व में ग्रामीण लघु सिंचाई विभाग के कार्यालय भी पहुंचे। लेकिन ग्रामीणों को योजना पूर्ण करने का सिर्फ आश्वासन ही मिल पाया है।
ग्रामीण ओम प्रकाश का कहना है कि पूर्व में बालखिला नदी से ग्रामीणों ने स्वयं ही गूल निर्मित की थी, लेकिन वह कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गई जिसके बाद सिंचाई की व्यवस्था न होने से करीब ढाई सौ नाली खेत बंजर पड़ गए।
यदि हाईड्रम योजना से गांव में पानी पहुुंचता तो इस भूमि पर उपजाऊ खेती हो सकती थी। मौजूदा समय में हाईड्रम योजना के पाइप जगह-जगह लावारिस हालत में पड़े हुए हैं। हाईड्रम से जोड़े गए पाइप भी क्षतिग्रस्त पड़े हुए हैं।
कोट
हाईड्रम योजनाओं के निर्माण में राज्य और केंद्र सरकार की ओर से धनराशि दी जानी थी लेकिन कई हाईड्रम योजनाओं में धनराशि का भुगतान नहीं हो पाया है। इस हाईड्रम योजना की क्या स्थिति है, इसे दिखवाया जाएगा।
- राजीव कुमार सक्सेना, ईई, लघु सिंचाई विभाग, चमोली