गोपेश्वर। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालय भरसार (पौड़ी) की ओर से देश के प्रथम गांव माणा के काश्तकारों को कृषि और बागवानी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। माणा-घिंघराण के प्रधान धर्मेंद्र चौहान के नेतृत्व में 20 काश्तकार मंगलवार को भरसार पहुंच गए हैं।
विगत वर्ष 23 नवंबर को विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. परविंदर कौशल माणा गांव में पहुंचे थे। तब उन्होंने कृषि व बागवानी के लिए माणा गांव को गोद लिया था। इसी के तहत विवि की ओर से यहां के काश्तकारों को कृषि व बागवानी का चार दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। पूर्व ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा ने बताया कि माणा गांव के साथ ही शीतकालीन प्रवास स्थल घिंघराण में आडू, कीवी और सेब के उत्पादन को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही बेमौसमी सब्जी उत्पादन के बारे में भी बताया जाएगा। माणा और शीतकालीन प्रवास स्थल घिंघराण गांव में जनजाति के ग्रामीण काश्तकारी करते हैं। माणा गांव में ग्रामीण सेब के साथ ही आलू, चौलाई, राजमा, बंद गाेभी, फूल गोभी, राई के साथ ही अन्य मौसमी सब्जियों का उत्पादन करते हैं। इस मौके पर राजेंद्र सिंह, रघुवीर सिंह, सुरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे। संवाद