गोपेश्वर। देश के प्रथम गांव माणा व आसपास के गांवों के ग्रामीण खेतों में आलू की खोदाई करने में जुटे हुए हैं। बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने से पहले ग्रामीण खेतों से आलू निकालकर बिक्री के लिए रख देते हैं। काश्तकारों ने अन्य नकदी फसलों को भी समेटना शुरू कर दिया है। माणा गांव के पूर्व ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा का कहना है कि अत्यधिक ठंडे मौसम और शुद्ध वातावरण में उगने वाले बदरीनाथ के आलू की गुणवत्ता और स्वाद बेहतरीन होता है। स्थानीय काश्तकारों के लिए आलू की फसल आजीविका का प्रमुख साधन है। संवाद