पिंडर घाटी के तीनों विकासखंडों की बिजली व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। हालात यह है कि आए दिन बिजली गुल हो रही है और निगम संसाधनों की कमी की चलते समय पर बिजली बहाल नहीं कर पा रहा है। ऐसे में पिछले एक सप्ताह में घाटी में महज 10 घंटे ही बिजली बहाल रही।
घाटी में नारायणबगड़ और देवाल दो बिजलीघर हैं। जहां से नारायणबगड़, थराली और देवाल तीनों विकासखंडों की 150 से अधिक ग्राम पंचायतों में बिजली आपूर्ति की जाती है, लेकिन आए दिन 33 और 11 केवी की लाइनों में फाल्ट के चलते घाटी की बिजली व्यवस्था चरमरा जाती है।
नारायणबगड़ के सामाजिक कार्यकर्ता जयवीर कंडारी का कहना है कि वर्ष 2014 में हुए हिमपात के दौरान भी घाटी में बिजली आपूर्ति महीनों ठप रही। इस दौरान किमोली, लेगुना सहित आस पास के ग्रामीणों ने खुद ही लाइनों की मरम्मत की, लेकिन वैकल्पिक रूप से तैयार की गई लाइनों को निगम आज तक दुरुस्त नहीं कर पाया है।
हालात यह है कि रविवार दोपहर को गुल हुई बिजली करीब 28 घंटे बाद सोमवार शाम चार बजे बहाल हुई। इधर ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता अमित शर्मा डिवीजन के तीन सबस्टेशनों में महज एक एसडीओ है। जबकि 8 जेई के पदों पर केवल तीन की तैनाती है। यही नहीं पिंडर घाटी में 8 महिला लाइनमैन की तैनाती है। ऐसे में जंगलों में लाइनों की मरम्मत जैसे कामों में समय लगता है।