भारी बारिश से मोक्ष नदी का जलस्तर बढ़ गया जिससे धुर्मा और सेरा गांव में रातभर अफरा-तफरी रही। मोक्ष नदी के उफान पर आने से धुर्मा गांव में एक गोशाला बह गई जबकि वहां बंधे चार मवेशी बह गए। कई मकान खतरे की जद में आ गए हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने पर नदी किनारे रह रह कई परिवारों ने घर छोड़ दिए और रात को ही सुरक्षित स्थानों पर अन्य ग्रामीणों के यहां चले गए। मंगलवार को सुबह नदी का जलस्तर कम होने पर ही लोग घरों को लौटे।
क्षेत्र में सोमवार रात से हो रही मूसलाधार बारिश मंगलवार को सुबह करीब नौ बजे थमी। मूसलाधार बारिश से मोक्ष नदी का जलस्तर बढ़ने से सेरा और धुर्मा गांव के ग्रामीण रातभर सो नहीं पाए। धुर्मा गांव में करीब 150 और सेरा गांव में 35 परिवार रहते हैं। धुर्मा गांव के हिम्मत सिंह, पुष्कर सिंह और चंदन सिंह ने बताया कि नदी किनारे के कुछ परिवारों ने अपने घरों को छोड़कर ऊपरी क्षेत्र में स्थित घरों में शरण ली। नदी के उफान पर आने से अवतार सिंह की गोशाला बह गई जबकि राजेंद्र सिंह के भवन को खतरा हो गया है। यहां कई अन्य मकानों को भी खतरा बना है। मंगलवार सुबह मोक्ष नदी का पानी सेरा बाजार तक पहुंच गया था लेकिन बारिश रुकी तो नदी का जलस्तर कम हो गया और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। सेरा गांव के पंकज सिंह नेगी, राजेंद्र सिंह की गोशाला के साथ चार मवेशी भी बह गए हैं। महिपाल सिंह गुसाईं के घराट का बड़ा हिस्सा बह गया है जबकि तारा देवी, शिवाय सिंह नेगी, महिपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, अवतार सिंह, देवेंद्र सिंह, विजय सिंह, विरेंद्र और विनोद के मकानों को खतरा हो गया है। सेरा गांव के सामाजिक कार्यकर्ता केवल सिंह नेगी ने सेरा बाजार में नदी के दोनों ओर बाढ़ सुरक्षा कार्य करने की मांग उठाई।