बुधवार रात एक बार फिर थराली में अतिवृष्टि हुई। सोलघाटी के सुपताल, ब्रहमताल व भेंकलताल बुग्याल में प्राणमती नदी में आए सैलाब ने रतगांव से लेकर कुलसारी तक नुकसान पहुंचाया। थराली में सूना व थराली के ग्रामीणों की ओर से बनाई गई अस्थाई पुलिया नदी के सैलाब में तिनके की तरह बह गया।
नगर पंचायत थराली के वार्ड नंबर 4 कोटडीप के नीचे दूसरी बार प्राणमति नदी का सैलाब रविवार को क्षतिग्रस्त हुए दो मकानों व एक गोशाला को बहा ले गया। थराली गांव के नीचे बना सैकड़ों साल पुराना ऐतिहासिक शिव मंदिर पूरी तरह से मलबे में डूब गया। यहां पर आठ परिवारों को खतरा हो गया है। तहसील प्रशासन ने सभी परिवारों को इस स्थान को छोड़ने को कह दिया है। बाढ़ में अपना सब कुछ गंवा चुके राधा देवी और प्रेम बुटोला का परिवार अपने रिश्तेदारों के यहां रह रहा है।
इस सैलाब में राधा देवी, गिरजा देवी और प्रेम बुटोला के मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए। साथ ही दो गोशालायें भी सैलाब में बह गई। जिससे चार पशु भी बह गए। रात को प्राणमति में आए मलबे ने पिंडर नदी में झील बना दी जिससे पूरे थराली में अफरा तफरी बच गई एसडीएम रविंद्र जुवांठा, तहसीलदार प्रदीप नेगी, कानूनगो जगदीश गैरोला व थानाध्यक्ष देवेंद्र रावत टीम के साथ थराली बाजार पहुंचे और सभी को तुरंत घर छोड़ने व सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा। वहीं रतगांव, ढाढरबगड़, बुरसोल गांव मेें कई हैक्टयेर भूमि नदी के सैलाब में बह गई।