बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए शनिवार को विधिविधान के साथ बंद कर दिए गए हैं। धाम में कपाट बंदी के समय 5000 से अधिक श्रद्धालु मौजूद रहे। सेना के बैंडों की मधुर भक्तिमय धुन और बदरीविशाल के जयकारों से पूरा धाम गूंज उठा।
शनिवार को कपाट बंद होने के दिन मंदिर सुबह 3 बजे खोला गया। अभिषेक के बाद भगवान बदरीनाथ का फूलों से शृंगार किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भगवान बदरीनाथ के दर्शन किए। दिन का भोग लगाने के बाद सायंकालीन आरती हुई और उसके बाद कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हुई। अपराह्न करीब 3 बजे रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वर प्रसाद नंबूदरी ने स्त्री वेष धारण कर मां लक्ष्मी को बदरीनाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रतिष्ठित किया। इससे पहले बदरीश पंचायत (मंदिर गर्भगृह) से उद्धव जी और कुबेर जी की प्रतिमाओं को सभा मंडप में लाया गया। जन्मपत्री का वाचन करने के बाद भगवान बदरीनाथ को महिला मंगल दल माणा की ओर से तैयार घृत कंबल पहनाया गया। इसके साथ ही अपराह्न 3:35 बजे मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। शाम को कुबेर जी की डोली रात्रि प्रवास के लिए बदरीनाथ धाम के निकट बामणी गांव लाई गई। रविवार 20 नवंबर को कुबेर व उद्घव जी की उत्सव डोली के साथ रावल पांडुकेश्वर गांव के लिए प्रस्थान करेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीकेटीसी को फोन से बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने पर शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि इस साल चारधाम यात्रा ने नया रिकार्ड बनाया है। चारों धामों में 46.5 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में जन सहयोग से केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के कार्य तेजी से चल रहे हैं। आने वाले दिनों में यहां तीर्थयात्रियों और आम लोगों को पर्याप्त सुविधाएं मिलेंगी।
इस बार बदरीनाथ धाम के दर्शनों को रिकॉर्ड तीर्थयात्री पहुंचे। तीर्थयात्रियों को दर्शनों के साथ ही ठहरने की कोई असुविधा नहीं होने दी गई। धाम में महायोजना का कार्य भी गतिमान है बावजूद इसके मंदिर समिति की ओर से बेहतर यात्रा व्यवस्थाएं की गई। आगामी वर्षों में यात्रा व्यवस्थाओं में इजाफा किया जाएगा।
अजेंद्र अजय, अध्यक्ष, बीकेटीसी, जोशीमठ/बदरीनाथ
ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज शनिवार को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के मौके पर धाम में मौजूद रहे।
प्राचीन धार्मिक परंपरा है कि बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने और बंद होने पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य भी मौजूद रहते हैं लेकिन अधिकांश समय शंकराचार्य के मठ से बाहर रहने पर कभी भी इस परंपरा का निर्वहन नहीं होता था। इस वर्ष परंपरा का निर्वहन के लिए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज शुक्रवार को ही धाम पहुंच गए थे। वे रविवार को रावल और धर्माधिकारी के साथ योग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर में भी रहेंगे। संवाद
इस बार रिकॉर्ड तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम पहुंचे। इस साल यात्रा में 17 लाख 60 हजार 646 श्रद्धालु धाम पहुंचे।
शनिवार को बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि इस साल यात्रियों की संख्या पिछले सालों की अपेक्षा ज्यादा रही है। मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि यात्रा से मंदिर समिति को करीब 33 करोड़ की आय हुई है। वहीं धाम में इस साल एक करोड़ 25 लाख के चौलाई के लड्डू बिके जिससे मंदिर समिति को 25 लाख रुपये की आय हुई।
धाम की यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न होने पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि सरकार, स्थानीय प्रशासन व आम लोगों के सहयोग से इस साल की यात्रा सफलता पूर्वक संपन्न हुई है।
कपाट बंद होने के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय, उपाध्यक्ष किशोर पंवार, मंदिर समिति के अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी, जयंती प्रसाद डंगवाल, सदस्य श्रीनिवास पोस्ती, पुष्कर जोशी, भास्कर डिमरी, आशुतोष डिमरी, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, वंदपाटह, रविंद्र भट्ट, थानाध्यक्ष केसी भट्ट आदि मौजूद रहे।