पूर्णा गांव में सैकड़ों नाली भूमि सिंचित करने के उद्देश्य से लगा नलकूप गांव का एक खेत भी नहीं सींच पाया।
नलकूप के कारण खेतों की ओर जाने वाली नहर भी बंजर पड़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की ओर से केवल नलकूप लगाया गया, लेकिन नलकूप संचालन के लिए कर्मी की तैनाती नहीं की गई।
वर्ष 2012 में नलकूप डिवीजन देहरादून की ओर से पूर्णा गांव में 14 लाख की लागत से नलकूप लगाया गया था, लेकिन चार साल से नलकूप संचालन केंद्र पर ताला लटका है।
पूर्णा गांव के प्रधान हरीश पांडे ने बताया कि पहले गांव की सिंचाई नहर से होती थी, लेकिन पूरे खेतों को पानी मिले इसलिए यहां नलकूप लगाया गया। अब स्थिति बदल गई है।
नहर से जिन खेतों की सिंचाई होती थी नलकूप लगने के बाद वो भी सूख गए।
ऐसे में लोग खेती छोड़ने को मजबूर हैं। विभाग को कई बार शिकायत करने के बाद भी नलकूप शुरू नहीं हो पाया।
यहां तक कि विभाग ने नलकूप संचालन के लिए किसी कर्मी की तैनाती भी नहीं की है। अब यहां बिना सिंचाई वाली फसलों का उत्पादन हो रहा है। ऐसे में उत्पादन भी घट गया है।
इंसेट
नहीं चला नलकूप, बिल 53 हजार
नलकूप संचालन के लिए ऊर्जा निगम ने केंद्र पर बिजली का कनेक्शन दिया है, लेकिन चार साल से नलकूप डिवीजन ने बिजली का बिल भी चुकता नहीं किया।
निगम के कर्मी हरीश चंद्र मिश्रा ने बताया कि नलकूप डिवीजन का बिल 53 हजार पहुंच चुका है। कई बार पत्राचार करने के बाद भी यह धनराशि जमा नहीं हुई है।
कोट
नलकूप संचालन के लिए विभाग के पास कोई बजट का प्रावधान नहीं है, जिसके चलते यहां किसी कर्मी की तैनाती नहीं की गई है। नलकूप क्यों नहीं चल रहा है कि जल्द जेई को भेजकर कार्रवाई की जाएगी। - बीपीएस पंवार अधिशासी अभियंता नलकूप डिवीजन देहरादून।