444 मेगावाट की विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना का पावर हाउस पांच मीटर भूमि के अंदर बनेगा, जो अलकनंदा के तल की बराबरी पर होगा। इससे परियोजना प्रभावित क्षेत्र में आपदा घटित होने पर भी बिजली उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
पीपलकोटी से लेकर हेलंग तक निर्मित होने वाली 13.4 भूमिगत टनल का निर्माण और भूमिगत पावर हाउस का निर्माण विस्फोट के बजाय टीबीएम (टनल बोरिंग मशीन) के जरिए किया जाएगा। यदि सब कुछ ठीकठाक रहा तो वर्ष 2019 तक परियोजना से बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा।
पीपलकोटी क्षेत्र में वर्ष 2003 से पीपलकोटी-विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा है। परियोजना के तहत एक बड़ी और तीन छोटी भूमिगत टनल बनेंगी। टनल निर्माण कार्य भी शुरू हो गए हैं। परियोजना निर्माण में क्षेत्र के 17 गांव प्रभावित हो रहे हैं।
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के जनरल मैनेजर यूके सक्सेना का कहना है कि परियोजना का पावर हाउस करीब पांच मीटर भूमि के अंदर बनाया जा रहा है। इससे क्षेत्र में घटित होने वाली आपदाओं का कोई असर नहीं होगा। हेलंग में परियोजना का डैम साइट और पीपलकोटी के हाट गांव में पावर हाउस का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 तक परियोजना से बिजली उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना एक नजर में
विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना रन ऑफ द रीवर योजना (नदी प्रवाह योजना) है। परियोजना के निर्माण पर 3745 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, टीएचडीसी की की ओर से अभी तक चार सौ करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। परियोजना से 1674 मिलियन यूनिट बिजली वर्षभर में उत्पादित की जाएगी, जिसमें से 13 फीसदी बिजली उत्तराखंड राज्य को निशुल्क दी जाएगी।