कर्णप्रयाग। बरसात में आवागमन बाधित न हो इसके लिए लोनिवि थराली से तैयारी शुरू कर दी है। यहां लगी हुई ओडर, सुपलीगाड़ और हरमनी ट्रॉली के संचालन के लिए विभाग ने निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है। बरसात के चार माह ग्रामीण इन ट्रॉलियों से आवागमन करते हैं जबकि पानी घटने पर अस्थायी पुलिया के सहारे आवागमन होता है।
पिंडरघाटी आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील है। वर्ष 2013 की आपदा में यहां पुल, झूला पुल सहित अन्य संपतियां बह गई थी। इनमें ओडर, हरमनी और सुपलीगाड़ के पुल भी थे। विभाग ने यहां तब हाईड्रोलिक ट्रालियों की व्यवस्था आवागमन के लिए की। जो अब भी बरसात में चल रही हैं। यहां चार माह बरसात में ग्रामीण इन ट्रालियों के साथ आवागमन करते हैं जबकि नदियों में पानी घटने पर अस्थायी पुलिया के सहारे आवागमन होता है। हालांकि हरमनी में विभाग ने ट्राली से 100 मीटर की दूरी पर पुल बनाया है लेकिन बरसात में पुल तक पहुंचने वाले मार्ग पर नाला आने के चलते यहां ट्राली का सहारा ग्रामीणों को लेना पड़ता है जबकि ओडर में पुल निर्माणाधीन है। लोनिवि के एई जेके टम्टा तीनों ट्रालियों के संचालन के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है। बरसात से पहले ट्रालियों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।