चमोली जिले के पहाड़ी क्षेत्रों से में विपणन की उचित व्यवस्था न होने व मशीनों से बने सामान की ओर लोगों का रुख होने से रिंगाल से बनने वाले सामान को खरीदार ही नहीं मिल रहे हैं।
आदिबदरी क्षेत्र के छिमटा, लंगटांई, पज्याणा, डांडा, मज्याड़ी, पिंडवाली, बूंगा व देवाल के सुतोल, कनोल सहित अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रिंगाल खूब होता है। ग्रामीण रिंगाल से बनाई जाने वाली कंडी, टोकरी, कुर्सी, सजोई, अनाज रखने की डाली, चटाई, फूलदान, सुप्पा, छाबड़ी आदि बनाकर अपनी रोजी-रोेटी चलाते थे, लेकिन वर्तमान समय में रिंगाल से बने सामान की डिमांड कम हो गई है। छिमटा के दीवान रूड़िया, अमरी रूड़िया, बेशाखू, बीसू, बलवंत व बूंगा गांव के रामपाल, जसपाल का कहना है कि पहले बाजारों में रिंगाल से बनाई गई चटाइयों को हाथों-हाथ खरीदा जाता था, लेकिन अब लोग मशीनों से बने सामान को खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। विपणन की व्यवस्था भी सही नहीं होने से रिंगाल का सामान नहीं बिक पाता है। उन्होंने सरकार से रिंगाल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करने की मांग की। कहा कि छोटी मशीनों के लिए कम ब्याज पर ऋण दिया जाए। सस्ती दर पर बिजली दी जाए और गांवों में सड़कें पहुंचाई जाएं ताकि उनकी ओर से बनाए गए सामान को बेचने के लिए बाजार तक पहुंचाया जा सके।