भगवान आदिबदरीनाथ के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार और परंपराओं के अनुसार बृहस्पतिवार शाम साढ़े सात बजे बंद कर दिए गए। अब एक माह बाद मकर संक्रांति के अवसर पर आदिबदरीनाथ के कपाट खुलेंगे। देर शाम तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
बृहस्पतिवार को पौष माह के संक्रांति के अवसर पर मंदिर के कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू हुई। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के पुजारी चंद्रबल्लभ थपलियाल और अन्य ने भगवान आदिबदरीनाथ की पूजा की। दिनभर सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम के बाद शाम साढ़े छह बजे पुजारी थपलियाल ने मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश किया और भगवान आदिबदरीनाथ का महाभिषेक किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में ग्रामीणों की ओर से तैयार कड़ाह भोग आदिबदरीनाथ को लगाया गया।
शाम सात बजे आदिबदरीनाथ की पंचज्वाला आरती के बाद उनका घृत लेपन किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भगवान के निर्वाण दर्शन किए और इसके बाद आदिबदरीनाथ के कपाट बंद कर दिए गए।
इस दौरान छिमटा निवासी और 12 साल पहले आयरलैंड बस चुके गोविंद सिंह और उनकी पत्नी अनीता ने अपने चारों बच्चों के साथ आदिबदरीनाथ में मत्था टेका। इस अवसर पर मंदिर समिति के संरक्षक नरेंद्र सिंह चाकर सहित अन्य पदाधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे।