अतिवृष्टि से 13 मकान और गोशालाएं मलबे में दबीं, 34 मवेशी मलबे में हुए दफन
आवाजाही का कोई साधन न होने से प्रशासनिक मदद भी नहीं पहुंच पा रही
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। चमोली जिले में आई आपदा से बहुत नुकसान हुआ है। सबसे विकट स्थिति दशोली ब्लॉक के तिफोरी, कोंज-पोथनी, काणा, खांडरा, नेणी, कुजों, मैकोट और बेलधार गांव की है। यहां सड़क मार्ग करीब 350 मीटर तक ध्वस्त होने से 700 परिवार घरों में ही कैद हो गए हैं। अतिवृष्टि से 13 मकान और 15 गोशालाएं मलबे में दब गईं जिससे 34 पशुओं की मौत हुई है। क्षेत्र में बिजली और पानी की सप्लाई भी ठप पड़ी है। जगह-जगह सात वाहन मलबे में दबे हैं। आवाजाही का कोई साधन न होने से प्रशासनिक मदद भी क्षेत्र में नहीं पहुंच पा रही है।
13 अगस्त की रात को हुई अतिवृष्टि से कोंज-पोथनी गांव के समीप पहाड़ियों में जबरदस्त भूस्खलन हुआ जिससे सड़क मार्ग करीब 350 मीटर तक ध्वस्त हो गया। कांडा गांव के प्राथमिक विद्यालय का भवन जमींदोज हो गया। कोंज-पोथनी गांव की महिला मंगल दल अध्यक्ष दीपा देवी और मोहन सिंह रावत ने बताया कि सड़कें ध्वस्त होने से गांवों में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई नहीं हो पा रही है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीण प्राकृतिक स्रोतों से पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। बिजली तीन दिनों से ठप है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया कि क्षेत्र में सड़क मार्ग को खोलने के लिए जेसीबी लगाई गई है। बिजली और पानी की सप्लाई भी जल्द सुचारु कर ली जाएगी।
मकानों को छोड़कर होटल और रिश्तेदारों के यहां गए 40 परिवार
दुर्गापुर गांव के प्रभावितों ने जिलाधिकारी से की विस्थापन की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी-
गोपेश्वर। आपदा प्रभावित दुर्गापुर गांव में करीब 40 परिवारों के मकानों मकानों को क्षति पहुंची है। मकानों में चारों ओर से दरारें आ गई हैं जिससे प्रभावित परिवार घरों को छोड़कर होटल व रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं। यहां सुरंग निर्माण कार्य से हो रहे विस्फोट से भी भू-धंसाव हो रहा है।
13 अगस्त की रात को दुर्गापुर गांव में एक मकान व चार गोशाला मलबे में दब गईं। लोगों ने घरों से भागकर किसी तरह अपनी जान बचाई जबकि गोशाला में बंधे 5 मवेशी मलबे में दब गए। कई मकानों में दरारें आ गई हैं। अतिवृष्टि के साथ ही क्षेत्र में चल रहे टीएचडीसी के सुरंग निर्माण कार्य में अत्यधिक विस्फोट से भी भू-धंसाव हो रहा है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर आमजन की सुरक्षा के लिए गांव के विस्थापन की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने अपने मकान छोड़ दिए हैं। अभी तक क्षेत्र का निरीक्षण करने कोई अधिकारी नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों ने मांग उठाई कि जब तक गांव का विस्थापन नहीं हो जाता तब तक टीएचडीसी का सुरंग निर्माण काम भी बंद रखा जाए। इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता तारेंद्र दत्त थपलियाल, ग्राम प्रधान सोनम, रामलाल, जगदीश लाल, इंदू लाल, वीरेंद्र लाल, दुर्गा चौहान, महेश लाल, मथुरा लाल, गुड्डी, रामेश्वरी, आरती, राधा, बीना आदि मौजूद रहे।
कोट
- गांव में मकान रहने लायक नहीं रह गए हैं। मकानों में दरारें पड़ी हैं। ग्राम प्रधान ने ठहरने के लिए लॉज में व्यवस्था की है। छोटी बच्ची के साथ तीन दिनों से लॉज में रह रही हूं। जिला प्रशासन से सुरक्षित स्थान पर गांव के पुनर्वास की मांग की है। - संतोषी, दुर्गापुर गांव निवासी।
- अतिवृष्टि से गांव तहस-नहस हो गया है। गांव में पानी, बिजली की सप्लाई ठप है। गांव के नीचे टीएचडीसी की सुरंग का निर्माण चल रहा है। यहां अत्यधिक विस्फोट किए जा रहे हैं। जिससे गांव को खतरा बना है। आपदा प्रभावित 40 परिवार लॉज में रह रहे हैं। - धर्मलाल, दुर्गापुर गांव निवासी
- मेरा मकान अतिवृष्टि से टूट गया है। मेरे बच्चे व मां लॉज में रह रहे हैं। गांव तक जाने के पैदल रास्ते भी नहीं बचे हैं। प्रशासन भी कब तक होटल में रखेगा। रात को नींद भी नहीं आ रही है। थोड़ी बारिश होने पर भी डर लग रहा है। - आरती देवी, दुर्गापुर गांव निवासी।
प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल-बिजली की सप्लाई सुचारु करने के निर्देश
पीपलकोटी। जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने पीपलकोटी क्षेत्र में आपदा प्रभावित मायापुर, गडोरा, ल्वाह, मेहरगांव, अगथला और बाटुला गांव का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावितों को हरसंभव मदद करने का भरोसा दिलाया है। डीएम ने ऊर्जा निगम व पेयजल निगम के अधिकारियों को पर्याप्त संख्या में मजदूर लगाकर बिजली व पानी की सप्लाई सुचारु करने और फिलहाल टैंकरों से पानी की सप्लाई करने के निर्देश दिए हैं। कहा कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को राशन किट दें और जिन लोगों को राहत शिविरों में शिफ्ट किया है, उनके भोजन के लिए कैंटीन शुरू करें। जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग को मायापुर में आवासीय भवनों में आ रहे पानी का रास्ता बदलने और तहसील प्रशासन को क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों का आंकलन करने के निर्देश भी दिए। इस मौके पर एसडीएम संतोष पांडेय, जिला पूर्ति अधिकारी जसवंत कंडारी, आपदा प्रबंधन अधिकारी एनके जोशी, एनएच के प्रबंधक गजेंद्र गौड़, तहसीलदार धीरज राणा, नगर पंचायत अध्यक्ष रमेश बंडवाल, अयोध्या हटवाल, अतुल शाह, विजय मलासी, देवेंद्र नेगी, मनोज कुमार आदि मौजूद रहे। संवाद
हाट गांव में शिव मंदिर बहा, शिवलिंग मलबे में दबा
प्राचीन समय में यहां से बदरीनाथ की पैदल यात्रा होती थी संचालित
भुवन शाह
पीपलकोटी। बंड क्षेत्र में 13 अगस्त की रात को हुई अतिवृष्टि में ग्राम पंचायत हाट गांव (छोटी काशी) में स्थित शिव मंदिर भी बह गया है जबकि मंदिर में शिवलिंग अभी अपने मूल स्थान पर है। मगर वह मलबे में दबा है। हाट गांव के इस शिव मंदिर से होते हुए ही प्राचीन समय में बदरीनाथ धाम की पैदल यात्रा संचालित होती थी। तीर्थयात्री यहां रात्रि प्रवास करते थे लेकिन यह मंदिर भी आपदा से अछूता नहीं रहा।
हाट गांव छोटी काशी के रूप में प्रसिद्ध है। तमिलनाडु से प्रतिवर्ष स्वामी श्री श्री तिरुज्ञानानंद जी महाराज के नेतृत्व में श्रद्धालुओं का दल हाट गांव के पौराणिक शिव मंदिर में पूजा कर घी का दीया जलाने पहुंचता है। श्रद्धालुओं की ओर से यहां दो क्विंटल घी का दीया जलाया जाता है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में तमिलनाडु के एक तीर्थयात्री ने इस शिव मंदिर में तीन साल तक कठोर तप किया था, जिसके बाद वे यहां से अंतर्ध्यान हो गए थे। तभी से यहां पर तमिलनाडु के श्रद्धालु प्रतिवर्ष एक दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान कर अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करते हैं। हाट गांव के ग्राम प्रधान राजेंद्र हटवाल ने बताया कि शिव मंदिर बरसाती गदेरे के उफान पर आने से बह गया है। मगर यहां शिवलिंग अभी मौजूद है। इस स्थान पर मंदिर की फिर से स्थापना की जाएगी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में हरसारी गांव को भी खतरा बना हुआ है। टीएचडीसी की ओर से यहां सुरंग निर्माण के लिए विस्फोट किए जा रहे हैं। हाट गांव के एलदाना और दशवाना घटगाड गदेरे से भी भू-कटाव होने से आवासीय मकानों को खतरा बना हुआ है। संवाद
निजमूला घाटी में तीन दिनों से बिजली सप्लाई ठप
पीपलकोटी। निजमूला घाटी के 14 गांवों में तीन दिनों से बिजली सप्लाई ठप है। बिरही में 66 केवी की बिजलर लाइन क्षतिग्रस्त होने से घाटी के गाड़ी, सेंजी, ब्यारा, निजमूला, मोली, मानुरा, हडुंग, थल्ली, गौणा, दुर्गी, पगना, पाणा, ईराणी व झींझी गांव में बिजली और संचार सेवा भी ठप है। गाड़ी, नेवा, सेंजी, ब्यारा, निजमूला सहित कई गांवों में पेयजल लाइनें भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त हैं। ग्राम प्रधान विजयलक्ष्मी, सरपंच तारेंद्र सिंह गड़िया, सुरेंद्र सिंह, करण सिंह, प्रकाश सिंह, राकेश आदि ने शीघ्र क्षेत्र में बिजली और पेयजल व्यवस्था सुचारु करने की मांग की है। वहीं गडोरा, अगथला, किरुली, कम्यार और मायापुर में टीएचडीसी और जल संस्थान के पांच टैंकरों से पेयजल सप्लाई की जा रही है। नगर पंचायत अध्यक्ष रमेश बंडवाल ने बताया कि करीब 25 स्थानीय लोग पेयजल लाइन को जोड़ने के लिए भूस्खलन क्षेत्र में गए, लेकिन पेयजल सप्लाई सुचारु नहीं हो पाई है। लॉज मालिक हेमंत फरस्वाण ने बताया कि पानी न होने से लॉज में तीर्थयात्रियों को नहीं ठहरा पा रहा हूं। होटल व्यवसायी सज्जन लाल शाह का कहना है कि वाहनों में ड्रम से पानी लाकर खाना पका रहे हैं। संवाद
शिफ्ट करने के निर्देश
पीपलकोटी। नगर पंचायत पीपलकोटी के परिसर में जेसीबी से मलबा साफ करने का काम शुरू हो गया है। यहां मलबे में दबी तीन बाइक निकाल दी गई हैं जबकि नगर पंचायत के तीन वाहन मलबे में दबे हैं। नगर पंचायत कार्यालय में मलबा भरा है। कार्यालय के आगे का दरवाजा तोड़कर वहां जमा पानी की निकासी करवाई गई। नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी बीना नेगी ने बताया कि नगर पंचायत के कर्मचारी भी मलबा हटाने में लगे हैं। जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने यहां रह रहे 17 परिवारों के 50 सदस्यों को काली कमली धर्मशाला और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के गेस्ट हाउस में शिफ्ट करने व उनके खाने-पानी की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। संवाद
विधायक राजेंद्र भंडारी ने किया आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण
पीपलकोटी। बदरीनाथ विधायक राजेंद्र भंडारी ने बुधवार को आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने आपदा प्रभावितों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। विधायक ने बिरही, अगथला, बाटुला, मायापुर, बैरागना, गडोरा और नौरख क्षेत्र का निरीक्षण किया। विधायक ने ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से आवंटित राहत शिविरों में शिफ्ट होने के लिए कहा। इस मौके पर मनोज कुमार, भुवन लाल शाह, सत्येंद्र नेगी, शंभु प्रसाद सती, राहुल राणा, सत्येंद्र कुंवर, नीरज नेगी आदि मौजूद रहे। संवाद
12 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद नदी पर बनाई अस्थायी पुलिया
प्राणमति नदी में आई बाढ़ से बह गया था सूना और थराली गांव को जोड़ने वाला पुल
रमेश जोशी
थराली। रविवार रात को प्राणमति नदी में आई बाढ़ से थराली व सूना को जोड़ने वाले दोनों पुल बहने से दोनों गांव के छह हजार लोगों का संपर्क मुख्यालय से कट गया था। लोनिवि ने इसमें समय लगने की बात कही तो 500 से अधिक ग्रामीण एकजुट हुए और 12 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तीस मीटर लंबी अस्थायी पुलिया बना ली।
सूना के नरेश देवराड़ी, रमेश चंद्र, अनिल देवराड़ी, मनोज, राजेंद्र सिंह, प्रेम सिंह ने कहा कि लोनिवि से पुल बनाने को कहा तो अधिकारियों ने इसमें समय ज्यादा लगने की बात की। इसके बाद ग्रामीणों ने बैठक की और यहां पुलिया बनाने का निर्णय लिया। इसके बाद 500 से अधिक ग्रामीण एकजुट हुए और पत्थर एकत्र कर बेसमेंट बनाया। नदी में बहकर आए चीड़ के पेड़ों से फट्टे बनाए। करीब 12 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद ग्रामीणों ने प्राणमति नदी पर लकड़ी की अस्थायी पुलिया बनाकर आवाजाही शुरू कर ली। पुल निर्माण के बाद ग्रामीण घर गए और तब खाने-पीने का सामान व दवाई लेने के लिए थराली बाजार पहुंचे। लोनिवि के अधिशाषी अभियंता एसएस रावत ने कहा कि वैली ब्रिज बनाने के लिए ऋषिकेश से सामग्री मंगाई जा रही है। एक माह के अंतर्गत वैली ब्रिज बनाकर तैयार कर दिया जाएगा। संवाद