जिले में नंदप्रयाग, क्षेत्रपाल और बिरही में नदी किनारे पर्यटन विभाग की ओर से निर्मित शोभा स्थल और स्नान घाट क्षतिग्रस्त पड़े हैं। आपदा के तीन साल बाद भी स्नान घाटों और शोभा स्थलों के सुधार का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में इस बार बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों को अलकनंदा नदी के तटों पर जान जोखिम में डालकर ही स्नान करना होगा।
चार धाम यात्रा के दौरान बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा पर आने वाले तीर्थयात्री चमोली कस्बे से थोड़ी दूरी स्थित अलकनंदा नदी के इन तटों पर स्नान करने और सूर्य को अर्घ्य देने के लिए भारी भीड़ जुटती है, लेकिन जलप्रलय से यहां स्नान घाट और पैदल रास्ते क्षतिग्रस्त पड़े हैं।
गुड्डू राजा, तेजवीर कंडेरी और महेंद्र सिंह का कहना है कि जलप्रलय से हुए नुकसान का अभी तक ट्रीटमेंट शुरू नहीं हो पाया है। चार धाम यात्रा शुरू होने में अब सिर्फ एक माह का समय शेष है, लेकिन पर्यटक स्थल तहस-नहस पड़े हैं।
नगर पालिका और पर्यटन विभाग से कई बार स्नान घाट के पुनर्निर्माण की मांग की गई, लेकिन स्थिति जस की तस है। डीएम विनोद कुमार सुमन का कहना है कि स्नान घाट और शोभा स्थल के सुधारीकरण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे जाएंगे। बदरीनाथ की यात्रा शुरू होने से इनके सुधार के लिए पर्यटन विभाग से वार्ता की जाएगी।