कपीरी पट्टी के पाडुली गांव में सिद्धपीठ राजराजेश्वरी भवानी मंदिर में क्षेत्र की सुख समृद्धि एवं खुशहाली के लिए 10 दिवसीय नवरात्रि एवं पौराणिक मेले का शुभारंभ हो गया। इस दौरान मंदिर में अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर भजन कीर्तन और देवी की पूजा-अर्चना की गई और श्रद्धालुओं ने देवी से राजी-खुशी रखने का आशीर्वाद मांगा।
मंदिर समिति के वरिष्ठ संरक्षक आलम सिंह पंवार ने बताया कि कार्यक्रम के शुभारंभ पर आचार्य द्वारिका प्रसाद सती और मोहन प्रसाद सती ने गणपति पंचांग पूजा, घट स्थापना और नवदुर्गा पूजन किया। इस दौरान गांव की ध्याणियों ने देवी को चूड़ी, बिंदी, कुंडल, सिंदूर आदि शृंगार सामग्री अर्पित की। गांव की बुजुर्ग महिलाओं ने गढ़वाली बोली में धार्मिक आयोजन के शुभारंभ पर मां भवानी देवी के परंपरागत गीत गाए। आसपास से आए भक्तों ने धूप-दीप से मां भवानी की पूजा कर उन्हें संतरा, नारंगी, सेब आदि फल अर्पित किए। ढोल दमाऊं की थाप और शंख व घंटियों की ध्वनि पर देवी ने अवतरित होकर भक्तों को आशीर्वाद व सुख समृद्धि का वरदान दिया। इस मौके मंदिर कमेटी के अध्यक्ष उपेंद्र पंवार, ममंद अध्यक्ष उर्मिला पंवार, अमृती देवी, रामी देवी, सोबती देवी, गोविंद नेगी, महाबीर भंडारी, सुरेंद्र पंवार, कलम पंवार, कनक खत्री, उपेंद्र पंवार, रतन खत्री, मदन सिंह, चैत सिंह, बवन सिंह आदि मौजूद थे।
आज तरवाड़ी में होगा नौगरी कौथिग का आयोजन
तिलवाड़ा। जखोली ब्लॉक के ग्राम पंचायत दरमोला के तरवाड़ी गांव में ढोल-दमाऊं की थाप पर पांडवों का नृत्य देखने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। बुधवार को अनुष्ठान में नौगरी कौथिग का आयोजन होगा। इस आयोजन में प्रवासी ग्रामीण व ध्याणियां भी शामिल हो रही हैं।
पांडव नृत्य समिति के अध्यक्ष भूपाल सिंह पंवार, पुजारी गिरीश डिमरी व कीर्ति प्रसाद डिमरी ने बताया कि दरमोला-तरवाड़ी में प्रतिवर्ष एकादशी के पर्व से पांडव नृत्य का आयोजन होता आ रहा है। इसमें गांव के प्रत्येक परिवार की ओर से सहयोग किया जाता है। इस वर्ष भी परंपरानुसार एकादशी के पर्व पर गंगा स्नान के साथ गांव में पांडव नृत्य शुरू हुआ। 4 दिसंबर को विधि-विधान के साथ पांडव वांण गांव से बाहर निकाले गए। उन्होंने बताया कि बुधवार को नौगरी कौथिग होगा, जिसमें पांडव गांव का भ्रमण कर भक्तों के घर भोजन करेंगे। 17 को गैंडा कौथिग और 18 दिसंबर को अनुष्ठान संपन्न हो जाएगा। संवाद