पिछले पांच माह से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी की उठापटक ऐन विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। कांग्रेस के प्रांतीय प्रवक्ता और जिला पंचायत उपाध्यक्ष लखपत बुटोला ने 23 सदस्यों का समर्थन हासिल होने का दावा किया है। बकौल बुटोला इसमें 13 सदस्य भाजपा के हैं।
बुटोला ने जल्द जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के संकेत दिए हैं। वहीं भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुटी है। सूत्रों की मानें तो बृहस्पतिवार को भाजपा के आला पदाधिकारियों ने भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष मुन्नी देवी शाह से नाखुश भाजपा के करीब दस सदस्यों ने अगस्त माह में अविश्वास प्रस्ताव लाने की चेेतावनी दी थी। 22 अगस्त को मुन्नी देवी शाह स्वास्थ्य कारणों से मेडिकल पर चली गईं, जिसके बाद नौ दिसंबर को मुन्नी देवी ने कार्यभार संभाला।
इस बीच उपाध्यक्ष और कांग्रेसी लखपत बुटोला कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर रहे, लेकिन मुन्नी देवी शाह की ओर से बुलाई गई 16 दिसंबर की बैठक में जिला पंचायत सदस्यों का विरोध खुलकर सामने आ गया। इसके चलते बैठक ही नहीं हुई।
सूत्रों की मानें तो बृहस्पतिवार को कर्णप्रयाग में आयोजित बैठक में भाजपा के जिला प्रभारी विनोद कंडारी, प्रदेश सचिव महेंद्र भट्ट सहित बड़े नेताओं ने जिला पंचायत सदस्यों को विधानसभा चुनावों तक किसी प्रकार की पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल न रहने की चेतावनी दी है। हालांकि विनोद कंडारी ने मामले में कोई बैठक होने से इंकार किया है, लेकिन पार्टी सूत्रों ने बताया कि भाजपा ने विधानसभा चुनावों से पहले आने वाले अविश्वास से चुनावों में होने वाले नुकसान का आंकलन करते हुए सदस्यों को हिदायत दी है।
बताया जा रहा कि बैठक में करीब 15 सदस्यों ने भाग लिया। वहीं दूसरी ओर लखपत बुटोला ने कहा कि उन्हें भाजपा के 13 और कांग्रेस के 10 सदस्यों का समर्थन हासिल है। जिला पंचायत अध्यक्ष विकास संबंधी किसी मामले में निर्णय नहीं ले पा रही हैं, जिसके चलते नाराज सदस्यों ने उन्हें समर्थन दिया है। जल्द ही जिला पंचायत के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा।