बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्म कपाल के बारे में अब कोई भी जानकारी घर बैठे हासिल हो सकेगी। श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए तीर्थ पुरोहित संघ ने ब्रह्म कपाल पर वेबसाइट तैयार करने का फैसला किया है। इसमें ब्रह्म कपाल से जुड़ी ऐतिहासिक, धार्मिक, आध्यात्मिक और अन्य सभी प्रकार की जानकारियां उपलब्ध होगी।
ब्रह्म कपाल में तीर्थयात्री अपने पितरों का तर्पण करते हैं। एक माह में यहां करीब 80 हजार तीर्थयात्री अपने पितरों का तर्पण कर चुके हैं। वर्ष 2013 की आपदा के बाद से ब्रह्म कपाल में पहली बार पितर तर्पण के लिए तीर्थयात्रियों का रैला उमड़ रहा है।
केदार खंड में वर्णित है कि सबसे पहले ब्रह्म कपाल में भोलेनाथ ने ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति के लिए तर्पण किया था। इसके बाद अपने पितरों के उद्घार के लिए पांडव परिवार ने भी यहां पर पितर तर्पण किया था। ब्रह्म कपाल तीर्थ पुरोहित संघ के अध्यक्ष उमानंद सती ने बताया कि ब्रह्म कपाल क्षेत्र में स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यहां पितर तर्पण करने से मनुष्य जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। तीर्थ पुरोहित डा. बृजेश सती ने बताया कि वेबसाइट जल्द ही तैयार की जाएगी।
ब्रह्म कपाल में तीर्थ पुरोहितों की ओर से तीर्थयात्रियों के पितरों का तर्पण किया जाता है। हर वर्ष अलग-अलग थोक के तीर्थ पुरोहित पितर तर्पण कार्य संपादित करते हैं। ब्रह्म कपाल के धार्मिक महत्व पर वेबसाइट बनने से तीर्थयात्रियों को सुविधा होगी।
-बीडी सिंह, मुख्य कार्याधिकारी, बीकेटीसी, बदरीनाथ।