राजकीय महाविद्यालय जोशीमठ की विभिन्न समस्याओं को लेकर छात्र रामकृष्ण खंडवाल और नरेश जोशी का आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी रहा। बुधवार को चिकित्सकों की ओर से छात्रों के स्वास्थ्य में आ रही गिरावट की सूचना मिलने पर प्रशासन ने अनशनकारियों को जबरन उठाने का प्रयास किया, जिसका छात्राओं और महिलाओं ने विरोध किया। विरोध के दौरान महिलाओं, छात्राओं की प्रशासन की टीम के साथ नोकझोंक हुई। इसके बाद प्रशासन की टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा।
जोशीमठ महाविद्यालय में प्राचार्य और प्रवक्ताओं की तैनाती सहित विभिन्न समस्याओं के निस्तारण की मांग को लेकर छात्र संघ पदाधिकारियों ने चार दिसंबर से आमरण अनशन शुरू किया था। अनशन के तीसरे दिन बुधवार को चिकित्सकों ने अनशनकारियों के स्वास्थ्य की जांच की तो स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई। इस पर एसडीएम योगेंद्र सिंह सुबह ग्यारह बजे पुलिस बल के साथ अनशन स्थल पर पहुंचे।
उन्होंने शासन की ओर से आगामी 17 दिसंबर तक दो अस्थायी प्रवक्ताओं की तैनाती करने की बात कही, लेकिन छात्रों ने आश्वासन पर अनशन स्थगित करने से साफ इनकार कर दिया। इस पर पुलिस ने जबरन अनशनकारियों को उठाने का प्रयास किया तो आसपास मौजूद छात्राओं और महिलाओं ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया।
आधे घंटे तक महिलाओं और प्रशासन के बीच नोकझोंक के बाद प्रशासन की टीम को लौटना पड़ा। नगर पालिका सभासद लता देवी का कहना है कि सरकार की ओर से छात्रों की न्यायोचित मांग को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। यदि प्रशासन ने इस तरह की कार्रवाई की पुनरावृत्ति की तो लोगों को साथ लेकर जन आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। इस मौके पर छात्र संघ अध्यक्ष गजेंद्र रावत, गुड्डी देवी, नैना, शिवानी, रिमझिम, मांडवी, जयदीप, लक्ष्मण बुटोला, अंशुल भुजवाण, अमरीश, जयदीप, आशीष और सचिन आदि मौजूद थे।