थराली में 8 माह में भालू के हमले की 20 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो चुकी है जबकि एक व्यक्ति विकलांग हो चुका है। अधिकतर घटनाएं सोल पट्टी के ऊपरी गांवों में हुई हैं।
रेंजर गोपाल बिष्ट ने कहा कि एक दशक में जिस तरह से जंगली जानवरों का बस्तियों में घुसकर ग्रामीणों पर हमला हो रहा है उसका सीधा संबंध घने व ऊंचाई पर स्थित जंगलों के कटान से है। पद्मश्री एवं पर्यावरणविद् कल्याण सिंह रावत का मानना है कि जिस प्रकार से बुग्यालों और जंगलों की दूरी वन कटान के चलते कम हो रही है उससे ये घटनाएं बढ़ रही हैं। बांज, काफल, भमोरा के जंगल कम होने से भी भालू अपने भोजन की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि विकास के नाम पर जो पेड़ काटे जा रहे हैं वहां पर सघन वृक्षारोपण किया जाए और वन प्रबंधन पर जोर दिया जाए।