वनाग्नि सुरक्षा सहित गढ़वाली बोली के संरक्षण का दे रहे संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। बाल कवि कार्तिक तिवारी की स्वरचित कविताओं की ऑस्ट्रेलिया में भी धूम रही। आकाशवाणी एडिलेड ऑस्ट्रेलिया पर कार्तिक की कविताओं का प्रसारण किया गया। कार्तिक ने वनाग्नि की सुरक्षा और गढ़वाली बोली और संस्कृति के संरक्षण पर कविताओं का व्याख्यान किया। उत्तराखंड के विनोद बिष्ट की ओर से आकाशवाणी एडिलेड पर कार्तिक तिवारी को आमंत्रित किया गया था।
13 वर्षीय कार्तिक की वनाग्नि सुरक्षा पर कविता धूं-धूंकर जंगल जल रहा है, जल रहे हैं डाली पत्ता-पत्ता, जंगल का हर प्राणी रो रहा है, धू-धूकर जंगल जल रहा है... का व्याख्यान किया। कार्तिक ने पहाड़ की संस्कृति पर भी कविता पाठ किया। हाल ही में कार्तिक को गढ़ भूमि लोक संस्कृति संरक्षण समिति की ओर से गढ़ गौरव सम्मान से भी सम्मानित किया गया। मात्र सात साल की उम्र से ही कार्तिक अपनी स्वरचित कविताओं के माध्यम से गढ़वाली बोली के संरक्षण में लगा हुआ है। कार्तिक के पिता सुधीर तिवारी और माता तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित मीना तिवारी ने बताया कि कार्तिक आम जन को भी गढ़वाली बोली के संरक्षण के लिए प्रेरित करता रहता है।