लामबगड़ में आए दिन हो रहे भूस्खलन से बदरीनाथ हाईवे बंद हो रहा है। जल्द ही इससे मुक्ति मिल जाएगी। लोनिवि एनएच भूस्खलन से मुक्ति पाने के लिए पिछले कई सालों से 400 मीटर की नई सड़क बना रही है। सड़क निर्माण में करीब 100 छोटे-बड़े पेड़ आने से दिक्कत हो रही थी, लेकिन अब सड़क बनाने के लिए पेड़ों के कटान की अनुमति मिल गई है।
वर्ष 1999 में आए भूकंप के बाद से लामबगड़ में करीब 400 मीटर चट्टान पर भूस्खलन शुरू हुआ था। वर्ष 2013 की आपदा के बाद भूस्खलन और ज्यादा सक्रिय हो गया। वर्ष 2016 में राज्य सरकार ने लामबगड़ ट्रीटमेंट कार्य सीमा सड़क संगठन से हटाकर एनएच के सुपुर्द किया। लामबगड़ ट्रीटमेंट के लिए एनएच को 96 करोड़ का बजट भी स्वीकृत किया गया।
एनएच ने अलकनंदा साइड से ट्रीटमेंट कार्य शुरू किया, लेकिन चट्टानी भाग पर कोई कार्य शुरू नहीं होने से भूस्खलन जारी है। एनएच के ईई जितेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि अब वन भूमि की अड़चन दूर हो गई है। लामबगड़ में चट्टान के दोनों ओर पेड़ों के कटान की अनुमति मिल गई है। एनएच की ओर से लामबगड़ में भूस्खलन वाली चट्टान के ठीक नीचे से 320 मीटर की रॉक फॉल बैरियर का निर्माण किया जाएगा, जबकि चट्टान को स्लोप देकर छोड़ दिया जाएगा। भूस्खलित चट्टान पर कोई छेड़छाड़ न करते हुए इसको हल्का स्लोप दिया जाएगा, भविष्य में भूस्खलन रुक जाएगा।
दिनों दिन खतरनाक होता जा रहा है भूस्खलन जोन
बदरीनाथ हाईवे धार्मिक के साथ ही सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह मार्ग बदरीनाथ धाम को जोड़ता है। साथ ही चीन सीमा क्षेत्र को जोड़ने वाला एकमात्र यातायात मार्ग है। लामबगड़ भूस्खलन जोन में वर्ष 2019 की छह अगस्त को श्रद्धालुओं से भरी बस ठीक चट्टान के नीचे दलदल में फंस गई थी। बस के ऊपर चट्टान से आए बोल्डरों से पांच श्रद्धालु की मौत हो गई थी, जबकि तीन घायल हो गए थे। इसी साल 17 सितंबर को भी यात्रियों की एक कार चट्टान के नीचे दलदल में फंस गई थी, यात्रियों ने भागकर जान बचाई।