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मंदिर समिति के नए अध्यक्ष पर टिकी हैं सबकी निगाहें

Sat, 05 Dec 2015 06:39 PM IST
गोपेश्वर
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देश की सबसे पुरानी मंदिर समितियों में से एक बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अखिल भारतीय स्वरूप की मांग ठंडे बस्ते में है। बीते वर्ष मंदिर समिति ने 75वें वर्ष में प्रवेश कर हीरक जयंती मनाई थी। तब समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल और समिति के पदाधिकारियों ने समिति के अखिल भारतीय स्वरूप के गठन की मांग जोर-शोर से उठाई थी। लेकिन सरकार की ओर से मांग पर कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है। 28 नवंबर को बीकेटीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कार्यकाल समाप्त हो गया है। ऐसे में समिति के नए अध्यक्ष पर समिति के अखिल भारतीय स्वरूप के गठन को लेकर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
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करोड़ों हिंदूओं की आस्था के केंद्र बदरीनाथ और केदारनाथ धामों में तीर्थयात्रा की व्यवस्था संभालने के लिए वर्ष 1939 में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का गठन किया गया। अब समिति को अखिल भारतीय स्वरूप देकर इसमें सनातन धर्म में आस्था रखने वाले मनीषियों, जानकारों के साथ-साथ शिक्षा, संस्कार और अलग-अलग क्षेत्रों में पहचान बनाने वाले विशिष्ट जनों को रखने की मांग उठ रही है। निवर्तमान अध्यक्ष गोदियाल का कहना है कि बीकेटीसी को अखिल भारतीय स्वरूप दिया जाना चाहिए। हिंदू धर्म की सभी शाखाओं को भी समिति में समेटा जाना चाहिए। समिति के राष्ट्रीय स्तर पर गठित होने से आपदा के चलते पटरी से उतरी दोनों धामों की तीर्थयात्रा भी पटरी पर लौट आएगी।

1939 में लागू हुआ था मंदिर समिति का अधिनियम
गोपेश्वर। वर्ष 1939 में बनी बदरी-केदार मंदिर समिति का अधिनियम 1941 से प्रभावी हुआ। मंदिर समिति अधिनियम की धारा 27 के अंतर्गत प्रताप सिंह चौहान डिप्टी कलक्टर स्पेशल ऑफिसर पद पर मंदिर समिति में नियुक्त हुए। वर्ष 1962 में इस पद को सचिव नाम दिया गया और वर्ष 1964 में इस पद को मुख्य कार्याधिकारी पद नाम दिया गया।
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सत्तापक्ष के हाथ होती है मंदिर समिति की डोर
गोपेश्वर। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के चयन को लेकर यह परंपरा ही बनी है कि इसमें सत्ताधारी दल के लोगों को ही अध्यक्ष और सदस्य बनाया जाता है। ऐसे में यह मांग उठना लाजमी है कि मंदिर समिति को राजनैतिक दलों के बजाय सनातन धर्म में आस्था रखने वाले बड़े-बड़े मनीषियों, विद्वानों और अन्य क्षेत्रों के ऐसे विशिष्ट जनों को रखा जाए जो मंदिर समिति को और अधिक विस्तार दे सकें।
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