थराली। 12 साल बाद भी ग्वालदम-खंपाधार मार्ग पर डामरीकरण नहीं हो पाया है। सात किमी लंबे इस मोटर मार्ग से चायखाना, मगरकुड़ा, फार्मधार और चिड़ंगा की तीन हजार से अधिक की आबादी जुड़ती है। यह सड़क बन जाएग तो देवाल से ग्वालदम की दूरी सिर्फ 10 किमी रह जाए जबकि अभी लोगों को देवाल से ग्वालदम जाने के लिए थराली होते हुए 38 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।
ग्वालदम के निवर्तमान प्रधान हीरा बोरा, सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल सिंह, विरेंद्र सिंह, हरेंद्र गड़िया, ताप सिंह, हरेंद्र परिहार, हरीश जोशी आदि का कहना है कि कुमाऊं से देवाल आने-जाने वाले सभी वाहन यहीं से गुजरते हैं, लेकिन 2012-13 में बनी इस सड़क का डामरीकरण नहीं हो पाया है। वहीं लोनिवि के ईई दिनेश मोहन गुप्ता का कहना है कि ग्वालदम-खंपाधार सड़क के डामरीकरण का प्रस्ताव चार-पांच सालों से शासन को जा रहा है लेकिन स्वीकृति नहीं मिली है। अब इस बार श्री नंदा राजजात यात्रा के तहत एक अलग प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। संवाद