वायु सेना ने बीते वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किए गए राहत, बचाव कार्य का उत्तराखंड शासन से हिसाब मांगा है। मुख्य सचिव ने चमोली जिला प्रशासन को बीते वर्षों में आपदा के दौरान वायु सेना की ओर से हेलीकॉप्टर और अन्य व्यय की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से वायु सेना के बिलों को खंगाला जा रहा है। वायु सेना के बकाया भुगतान को शासन इसलिए भी गंभीरता से ले रहा है कि आने वाले समय में आपदा के दौरान वायु सेना व सेना राहत, बचाव कार्य से हाथ पीछे न खींच दे।
वर्ष 2013 की केदारनाथ त्रासदी के साथ ही अन्य घटित आपदाओं में सेना और वायु सेना संकटमोचन के रुप में सामने आई है। वर्ष 2013 में ही केदारनाथ, बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब में फंसे तीर्थयात्रियों के लिए भी वायु सेना के जवान देवदूत बनकर आए थे। बताया जा रहा है कि शासन की ओर से वायु सेना को आपदा राहत, बचाव कार्य के एवज में लगभग बीस करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है। चमोली जिले से भी वायु सेना की करीब छह लाख रुपये की देनदारी है।
वायु सेना के उच्च अधिकारियों ने बकाया बिलों के भुगतान के लिए उत्तराखंड शासन को पत्र भेजा है। मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को वायु सेना की ओर से आपदा राहत, बचाव कार्य पर किए गए खर्च की रिपोर्ट तलब की है। आपदा डायरेक्टर पीयूष रौतेला ने बताया कि इन दिनों वायु सेना के खर्चे की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जल्द ही इसे शासन को सौंप दिया जाएगा। इधर, चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि शासन के निर्देश पर एटीएफ के बकाया भुगतान की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट जल्द ही शासन को सौंप दी जाएगी।