जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में विराजमान हुई आदि गुरु शंकराचार्य की उत्सव डोली।
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बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद परंपरानुसार सोमवार को आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी नृसिंह मंदिर जोशीमठ में विराजमान हो गई। जोशीमठ पहुंचने पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गद्दी का भव्य स्वागत किया। शंकराचार्य की गद्दी के नृसिंह मंदिर में विराजमान होने के साथ ही चारधाम यात्रा का औपचारिक समापन हो गया।
बदरीनाथ धाम के कपाट 19 नवंबर को बंद हो गए थे जिसके बाद कुबेर जी और उद्धव जी की भोगमूर्ति रविवार को अपने शीतकालीन पूजा स्थल पांडुकेश्वर स्थित योगध्यान बदरी में विराजमान हुई। सोमवार को 10 बजे योगध्यान बदरी में पूजा-अर्चना के बाद बदरीनाथ के रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी, शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, धर्माधिकारी राधा कृष्ण थपलियाल के नेतृत्व में आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ के लिए रवाना हुई।
जोशीमठ पहुंचने पर गद्दी को नृसिंह मंदिर में विराजमान किया गया। इस दौरान संस्कृत विद्यालय के छात्रों ने स्वस्तिवाचन मंगलाचरण और शांतिपाठ किया। महिलाओं ने फूल मालाओं से डोली का स्वागत किया और भजन-कीर्तन किए। रावल ने नृसिंह मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद वितरण किया। इसके साथ ही चारधाम यात्रा का औपचारिक समापन हो गया और योग ध्यान बदरी पांडुकेश्वर और नृसिंह मंदिर में शीतकालीन पूजाएं शुरू हो गईं। इस अवसर पर ऋषि प्रसाद सती, भगवती प्रसाद नंबूरी, सोहन सिंह बेजवाड़ी, कृपाल सिंह सनवाल, डा. हरीश गौड़ आदि मौजूद रहे।