बदरीनाथ। बदरीनाथ धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन स्वामी रामललाचार्य महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्ति, अध्यात्म और निरहंकारिता का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भक्ति और अध्यात्म के मार्ग पर चलकर मनुष्य के अंत:करण में ज्ञान का प्रकाश प्रकट होता है। अहंकार का त्याग कर ईश्वर के प्रति समर्पण भाव रखना चाहिए।
स्वामी रामललाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान का नाम जपने के लिए किसी विशेष दिन, समय या परिस्थिति का इंतजार नहीं करना चाहिए। मनुष्य को निरंतर भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए। नियमित रूप से प्रभु का नाम जपने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति अध्यात्म के मार्ग पर आगे बढ़ता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में भक्ति भाव अपनाने, अहंकार से दूर रहने और ईश्वर के प्रति आस्था बनाए रखने का संदेश दिया। संवाद