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संचार क्रांति के दौर में चार सौ रुपये में एक फोन कॉल

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संचार क्रांति के दौर में चमोली जिले की नीती घाटी के ग्रामीणों को एक फोन कॉल करने के लिए चार सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। घाटी में बीएसएनएल के सेटेलाइट फोन जून माह से डेड होने के कारण यह समस्या बनी हुई है। ऐसे में ग्रामीणों को परिचितों से बात करने के लिए सौ किमी दूर चार सौ रुपये खर्च कर जाना पड़ रहा है।
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चीन सीमा क्षेत्र स्थित नीती घाटी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। घाटी के नीती, गमशाली, बांपा, मेहरगांव, फरगांव, कैलाशपुर, मलारी, कोषा और द्रोणागिरी में भोटिया जनजाति के ग्रामीण रहते हैं। वर्ष 2009 में बीएसएनएल ने घाटी में ग्रामीणों को सेटेलाइट फोन बांटे थे। ग्रामीणों को बात करने के लिए प्रति कॉल पांच रुपये की दर से जमा करने पड़ते थे, लेकिन जून माह से ये फोन बंद पड़े हैं। ग्रामीणों को मैदानी क्षेत्रों में रोजगार कर रहे अपने बेटे-बेटियों और और परिजनों से बात करने के लिए सौ किलोमीटर की दूरी वाहन से तय कर जोशीमठ आना पड़ रहा है। नीती गांव से जोशीमठ तक आना-जाने का किराया चार सौ रुपये है। गमशाली गांव के 83 वर्षीय आलम सिंह चौहान, बचन सिंह रावत, भूपाल सिंह चौहान, बेलमती फोनिया, जानकी देवी और बांपा गांव के त्रिलोक सिंह व पूर्ण सिंह का कहना है कि संचार सेवा न होने से जून माह से नीती घाटी अलग-थलग पड़ी हुई है। सुविधा के नाम पर हमें कुछ नहीं चाहिए, सिर्फ घाटी को संचार सेवा से जोड़ दिया जाए, जिससे अपने बच्चों की आवाज सुन सकें।
नीती घाटी के ग्रामीणों को दिए गए सैटेलाइट फोन की समय सीमा समाप्त हो गई है। अब इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) की मदद से दोबारा नीती घाटी को सैटेलाइट फोन से जोड़ा जाएगा। - विजयपाल, जीएम, दूरसंचार विभाग, श्रीनगर, गढ़वाल।
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