गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम और सिखों के प्रसिद्ध तीर्थ हेमकुंड साहिब की छह माह की तीर्थयात्रा के लिए अब गेंदे के फूल ऋषिकेश और देहरादून से नहीं मंगाने पडे़ंगे। जिला उद्यान विभाग की योजना सफल रही तो ग्रामीणाें की ओर से दोनों धामों के लिए छह माह तक फूल उपलब्ध कराए जाएंगे।
उद्यान विभाग यात्रा पड़ाव चमोली बाजार से गोविंदघाट तक 23 हेक्टेयर भू-भाग पर फूलों की खेती शुरू करने जा रहा है। इस कार्य पर विभाग 20 लाख रुपये की धनराशि भी खर्च करेगा। खेती के लिए जगह चिह्नित कर ली गई है। अगले वर्ष मार्च माह से फूलों की खेती शुरू हो जाएगी। यात्राकाल में बदरीनाथ धाम में गेंदे के फूल धाम की सजावट के साथ ही भगवान को चढ़ाए जाते हैं। यात्राकाल में यहां करीब 50 क्विंटल फूलों की खपत होती है। हेमकुंड साहिब में हेमकुंड, लक्ष्मण मंदिर और सरोवर की साज-सज्जा के लिए करीब 20 क्विंटल गेंदे के फूल पंजाब से ही मंगाए जाते हैं। बदरीनाथ में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और हेमकुंड साहिब में गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी फूलों की व्यवस्था करती है लेकिन अब जिला उद्यान विभाग ही बदरीनाथ यात्रा पड़ावों पर गेंदे के फूलों की व्यवस्था की तैयारी कर रहा है। इससे काश्तकारों को आर्थिक फायदा भी होगा और धामों में समय पर ताजे फूल भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
कैदी भी भेजेंगे पांच क्विंटल फूल
गोपेश्वर। आगामी वर्ष बदरीनाथ धाम की साज-सज्जा के लिए जिला जेल पुरसाड़ी में भी गेंदे के फूलों की नर्सरी तैयार हो गई है। जेल में कैदियों ने विभिन्न प्रकार के फूलों की नर्सरी भी तैयार की है। जेलर प्रेम सिंह चौहान ने बताया कि इस बार जेल से करीब तीन क्विंटल गेंदे के फूल बदरीनाथ भिजवाए गए थे। अगले वर्ष करीब पांच क्विंटल फूल बदरीनाथ भिजवाए जाएंगे।
यात्रा पड़ावों पर भूमि का चयन कर लिया गया है। उद्यान विभाग के अधिकारी फूलों की खेती की मॉनीटरिंग करेंगे। अगले वर्ष मई माह तक फूलों की खेती तैयार हो जाएगी। - डीएल शाह, जिला उद्यान अधिकारी, चमोली।