गोपेश्वर। अलकनंदा नदी पर प्रस्तावित 300 मेगावाट की बांवला-नंदप्रयाग जल विद्युत परियोजना का विरोध निर्माण से पहले ही शुरू हो गया है। परियोजना प्रभावित क्षेत्र में आ रहे ग्रामीणों ने निर्मात्री कंपनी यूजेवीएनएल (उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड) के अधिकारियों से परियोजना कार्य शुरू होने से पूर्व उनकी मांगों के निस्तारण की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से बांवला से नंदप्रयाग तक करीब 10 किमी दायरे में 30 गांव के करीब 750 परिवार प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन कंपनी ने मात्र 54 परिवारों को ही प्रभावितों की श्रेणी में रखा है।
चमोली निवासी महेंद्र सिंह, बलवीर सिंह, सुनील, अरविंद कुमार, राकेश लाल, रोशन लाल, बुद्धि सिंह, मंगल सिंह, सुभागा देवी, बसंती देवी, दमयंती देवी और सतेश्वरी देवी का कहना है कि सबसे पहले परियोजना निर्माण से संबंधित डीपीआर और दस्तावेज अंग्रेजी के बजाय हिंदी में प्रकाशित किए जाएं, जिससे प्रभावितों के सामने परियोजना को लेकर कोई संशय न रहे। उन्होंने कहा कि परियोजना निर्माण से पूर्व प्रभावित क्षेत्रों के लोगों का विस्थापन, स्थायी रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा और पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए, अन्यथा निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों ने इस संबंध में डीएम को ज्ञापन भेजा। कहा गया कि परियोजना के दोनों साइड के गांवों को प्रभावित श्रेणी में रखा जाए, साथ ही स्थानीय बेरोजगारों को स्थायी रोजगार दिया जाए।