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शीतकालीन यात्रा से मिलेगी पहचान और रोजगार

Fri, 17 Oct 2014 05:32 AM IST
Chamoli
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गोपेश्वर। शीतकालीन चारधाम यात्रा से गढ़वाल के कई प्राचीन मठ-मंदिरों के दिन बहुरने की उम्मीद जगी है। यहां कई मठ-मंदिर हैं अब भी तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की नजरों से दूर हैं। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा। यही वजह है कि शीतकालीन यात्रा का सब स्वागत कर रहे हैं। हालांकि तीर्र्थों तक पहुंचने के लिए सड़कें और अन्य सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है। भगवान बदरीनाथ का शीतकालीन प्रवास स्थल पांडुकेश्वर पांडवों की जन्म स्थली भी है, लेकिन इस बारे में ज्यादा लोगों को मालूम नहीं। शीतकालीन यात्रा से इसे भी पहचान मिलेगी।
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राजा पांडू श्राप से मुक्ति पाने के लिए अपनी पत्नियों कुंती और माद्री के साथ हिमालय क्षेत्र में पहुंचे थे। यहां कुंती और माद्री को भगवान विष्णु से सत्यवादी, पवन देव से पहलवान, इंद्र से धर्नुधर और अस्विन और कुमार देव से दो राजा जैसे पुत्र रत्न प्राप्त हुए। तभी से इस पवित्र स्थान का नाम पांडुकेश्वर पड़ा। पांडुकेश्वर से ही पांचों पांडव भगवान कृष्ण के साथ हिमालय क्षेत्र से होकर हस्तिनापुर गए थे। पांडुकेश्वर में भगवान बदरीनाथ और भगवान कृष्ण के मंदिर हैं। बदरीनाथ यहां भोग मुद्रा में विराजमान हैं।

बदरीनाथ क्षेत्र में कण-कण में भगवान का वास है। पांडुकेश्वर में पांचों पांडवों का जन्म हुआ। शास्त्रों में वर्णित है कि अर्जुन ने भीष्म पितामह से अपना जन्म हिमालय क्षेत्र में होना बताया। गुरु गोविंद सिंह ने अपनी पूर्व जन्म पर लिखे विचित्र नाटक में पांडु और माद्री के हेमकुंड साहिब क्षेत्र में शरीर त्यागने की बात कही है। - भुवन उनियाल, धर्माधिकारी, बदरीनाथ।
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इन मठ-मंदिरों के भी बहुरेंगे दिन
गोपीनाथ मंदिर, अत्रि अनुसूया आश्रम, भविष्य बदरी, कल्पेश्वर मंदिर आदि।

बर्फीली राह से आसान नहीं होगी शीतकालीन यात्रा
उत्तरकाशी। शीतकालीन यात्रा की राह आसान नहीं है। दिसंबर से फरवरी तक होने वाली बर्फबारी श्रद्धालुओं की राह में रोड़ा बन सकती है।
सरकार ने शीतकालीन यात्रा शुरू करने की पहल तो कर दी है, लेकिन भारी बर्फबारी के दौरान सड़कों को यातायात के लिए चालू रखने वाले विभागों से राय नहीं ली गई। शीतकाल में यमुना की पूजा खरसाली तथा गंगा की पूजा मुखबा में होती है। दोनों ही गांव दिसंबर से फरवरी माह तक अधिकांश समय बर्फ से ढके रहते हैं। गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे कई दिनों के लिए बंद हो जाता है। बर्फबारी के दौरान फिसलन से सड़क जोखिम भरी बनी रहती है। ऐसे में इस साल से शुरू होने वाली शीतकालीन यात्रा को निर्विघभन चालू रखना आसान नहीं है।

कोट.........
शीतकालीन यात्रा के लिए सरकार ने हमसे कोई राय नहीं ली है। सड़क चालू रखने के लिए सरकार के पूछने पर मशीनों की डिमांड की जाएगी। फिलहाल सड़क खोलने के लिए हमारे पास डोजर और जेसीबी हैं।- चंद्रशेखर, कमांडर सड़क सीमा संगठन।

कोट....
शीतकालीन यात्रा सराहनीय पहल है। हालांकि इसके लिए बर्फबारी के दौरान सड़क को यातायात के लिए चालू रखना होगा। इसके अलावा अन्य बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
संजीव सेमवाल, रजनीकांत सेमवाल, तीर्थ पुरोहित गंगोत्री धाम।


शीतकालीन यात्रा से होगा लाभ
रुद्रप्रयाग। शीतकालीन यात्रा से गुमनाम अन्य तीर्थस्थल भी श्रद्धालुओं और सैलानियों की नजर में आ सकते हैं। सैलानी आएंगे, तो लोगों की आजीविका ढर्रे पर आ पाएगी।
सात अक्तूबर को ऊखीमठ में हुई बैठक में तय हुआ था कि केदारनाथ, मद्महेश्वर और तुंगनाथ मंदिर के हिमाच्छादित होने से यहां यात्रा संभव नहीं है, लेकिन जिले के अन्य हिस्सों में शीतकालीन यात्रा संचालित होनी चाहिए। इसके आधार पर प्रशासन ने 20 धार्मिक/पर्यटन स्थलों की सूची शासन को भेजी। ऊखीमठ के ज्येष्ठ उप प्रमुख विष्णुकांत शुक्ला कहते हैं कि शीतकालीन यात्रा से लमगौंडी क्षेत्र में वाणासुर, चंडिका मंदिर और पंचवक्र महादेव जैसे पौराणिक महत्व के मंदिरों को पहचान मिलेगी। शीतकाल में लोग यहां आएंगे, तो सभी को फायदा होगा।

यह स्थान किए गए हैं चिह्नित
ओंकारेश्वर मदिर, भोलेश्वर मंदिर, बारही मंदिर, मक्कूमठ, चोपता, दुग्गलभिट्टा, देवरियाताल, शाकंबरी मंदिर, त्रियुगीनारायण मंदिर, जमदग्नि आश्रम, नागताल, महर्षि मर्दिनी देवी, नारायणकोटी मंदिर समूह, त्रिपुरा सुंदरी, नल-नील मंदिर, जाखदेवता, विश्वनाथ मंदिर, अर्द्धनारेश्वर, कालीमठ मंदिर, कविल्ठा, कोटिमाहेश्वरी मंदिर, रुच्छ महादेव मंदिर, कालीशिला, राकेश्वरी मंदिर, मद्महेश्वर मंदिर (गडगू), बाणासुर मंदिर, अनिरुद्ध मंदिर, राज राजेश्वरी मंदिर, पंचवक्र, राज राजेश्वरी मंदिर, चंडिका मंदिर, दुर्गा मंदिर, तुंगेश्वर महादेव और राजेश्वरी देवी मंदिर।

इन धार्मिक/पर्यटन स्थलों और समीपस्थ स्थानों में ठहरने और खाने की व्यवस्था है। आवागमन की इन भी कोई दिक्कत नहीं है। - राहुल गोयल, प्रभारी डीएम रुद्रप्रयाग
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