गोपेश्वर। शीतकाल में पांडुकेश्वर में भगवान बदरीनाथ की पूजा-अर्चना डिमरी ब्राह्मणों द्वारा की जाती है। जोशीमठ से 21 किमी की दूरी पर स्थित पांडुकेश्वर में बदरीनाथ के प्रतिनिधि के रूप में उद्धव जी की पूजा-अर्चना होती है। बदरीश पंचायत के भगवान कुबेर की उत्सव डोली भी छह माह पांडुकेश्वर में ही प्रवास करती है। पांडुकेश्वर में कुबेर और उद्धव के प्राचीन मंदिर स्थित हैं। शीतकाल में पांडुकेश्वर के पास की चोटियों तक बर्फबारी होती है, लिहाजा तीर्थयात्री और पर्यटक तीर्थ भ्रमण के साथ ही नैसर्गिक सौंदर्य का लुत्फ भी उठा सकेंगे। जोशीमठ नृसिंह मंदिर में आदि गुरु शंकराचार्य और नृसिंह भगवान के दर्शन होते हैं। तीर्थयात्री शीतकाल में शंकराचार्य गद्दी के दर्शन के लिए जोशीमठ नृसिंह मंदिर जा सकते हैं।
क्या कहते हैं मंदिर कमेटी के अधिकारी और धर्माधिकारी
शीतकाल चार धाम यात्रा से तीर्थाटन और पर्यटन को लाभ होगा। यात्री जोशीमठ से पांडुकेश्वर तक अन्य मठ-मंदिरों के दर्शनों को भी पहुंचेंगे। पांडुकेश्वर क्षेत्र में ही कई अन्य पौराणिक मठ-मंदिर भी दर्शनीय हैं। सरकार की यह पहल व्यवसाय को नया आयाम देगी।
भुवन चंद्र उनियाल, धर्माधिकारी, बदरीनाथ धाम।
शीतकाल चार धाम यात्रा से हमारे धार्मिक स्थलों को विश्व पटल पर नई पहचान मिलेगी। आपदा से त्रस्त बदरीनाथ पड़ावों पर व्यवसाय चला रहे ग्रामीणों के चेहरों पर फिर से रौनक लौट आएगी।
बीडी सिंह, मुख्य कार्याधिकारी, बीकेटीसी।