धनतेरस दिवाली से पूर्व मनाए जाने वाला प्रमुख पर्व है। यह देवों के वैद्य धन्वंतरि से जुड़ा है। इसका निहितार्थ यह है कि धन से भी जरूरी स्वास्थ्य है। अगर स्वास्थ्य अच्छा है तो लक्ष्मी स्वमेव ही व्यक्ति का वरण कर लेंगी। यह भी माना गया है कि धन्वंतरि समुद्र मंथन के समय अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन कलश (बर्तन) खरीदना शुभ होता है क्योंकि उसमें अमृत का वास हो जाता है। धनतेरस की एक कथा पौराणिक राजा हेम की पुत्रवधू से जुड़ी है। जिसने धनतेरस के दिन अपनी पति की तय मृत्यु को दीपदान के जरिए टाल दिया था। सदियों से धनतेरस पर यम को दीपदान और बर्तन खरीदने की परंपरा चली आ रही है। अब बाजार के कलेवर बदले हैं तो लोगों के मनाने का अंदाज भी बदल गया है। अब इस अवसर पर नई-नई चीजों का खरीदना शुभ माना जाने लगा है। जो भी हो यह एक ऐसा पर्व है जिसमें समृद्धि, उत्सव और उल्लास सभी का समावेश है।
धन तेरस और दीपावली को सजे बाजार
नई टिहरी। दीपावली के त्योहार पर नई टिहरी के बाजार भी चकमक हैं। तीन हिस्सों में बंटे इस शहर को व्यापारियों ने लड़ियों और दूसरी सजवाटी सामानों से सजा रखा है। पटाखों की दुकानें भी खुले स्थानों पर लगी है। जबकि धनतेरस को देखते हुए बर्तनों की दुकानों में कई फैंसी सामान इस मौके पर उपलब्ध है। बर्तन व्यापारी एवं व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष भगत सिंह चौहान का कहना है कि इस बार कई नई आइटमें बाजार में हैं। जिन्हें लेकर लोगों में खासा उत्साह है। इलेक्ट्रिक सामान बेचने वाले दुकानों में इस बार इंडेक्शन चूल्हे भी बड़ी मात्रा में देखने को मिल रहे हैं। कारण रसोई गैस के बढ़ते दामों और समय पर उपलब्ध न होने से लोगों को रुझान इस ओर है। इलेक्ट्रिकल का सामान बेचने वालों को भरोसा है कि इस बार ये चूल्हे भी खूब बिकेंगे।
उत्तरकाशी। एक ओर दीपावली का त्योहार और ऊपर से खूब सारी छुट्टियां। ऐसे में शहर में खूब रंगत है। पूरा बाजार सजा हुआ है। पटाखे, खील बताशों के साथ ही बर्तनों की दुकानों पर भी खूब भीड़ है। बर्तन व्यापारियों ने धनतेरस के दिन के लिए खासी तैयारियां कर रखी हैं। कई नए फैंसी सामान बाजार में उपलब्ध हैं। धनतेरस पर स्वर्णकारों ने भी खासी तैयारियां कर रखी हैं। खासतौर पर चांदी के सिक्के नए-नए रूपों में सामने हैं। चांदी के सिक्कों पर लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा खूबसूरती से उकेरी गई हैं। ऐसे में कोई भी इसका लोभ से दूर नहीं हो सकता।
कर्णप्रयाग। धन तेरस एवं दीपावली की तैयारियों को लेकर कर्णनगरी सजने लगी है। मुख्य बाजार में आतिशबाजी सहित खिल-बताशे एवं लाइटिंग की दुकानें तैयार होने लगी हैं। इस बार भी मुख्य बाजार में एक दर्जन से अधिक आतिशबाजी की दुकानों में कई प्रकार के पटाखे मौजूद हैं। इलेक्ट्रानिक की दुकानों में देशी-विदेशी लाइट लड़ियां भी रौनक बढ़ा रही हैं। वहीं नए-नए डिजायन के इलेक्ट्रानिक सामान भी बाजार में दिख रहे हैं। धन तेरस को लेकर बर्तन की दुकानों में भी पंच बर्तन उपलब्ध हैं। वहीं पूजन सामग्री के तहत भी बर्तनों के नए-नए डिजायन दिखाई दे रहे हैं। उधर गैरसैंण सहित पिंडरघाटी के नारायणबगड़, थराली एवं देवाल में भी दीपावली की तैयारियों को लेकर दुकानदारों ने अपनी दुकानों को सजाना शुरू कर दिया है। गोपेश्वर, पौड़ी, रुद्रप्रयाग में भी धनतेरस को लेकर दुकानदारों ने खासी तैयारियां कर रखी हैं।
कोटद्वार। दीपावली के लिए सजे बाजार में जहां पारंपरिक सामान मिल रहा है, वहीं इसी का फैंसी लुक लोगों को आकर्षित कर रहा है। यहां तक कि भगवान की मूर्तियों को भी एक से बढ़कर एक फैंसी लुक में बाजार में उतारा गया है। दीपावली में जहां पारंपरिक उत्पादों की बाजार में धूम मची है, वहीं फैंसी लुक भी इन सामानों को पूरी टक्कर दे रहा है। बाजार में हर कदम पर अलग वैरायटी का सामान दिख रहा है।
दीपावली को सजे बाजार
कालागढ़। दीपावली को लेकर बाजार में खरीददारों की खूब भीड़ उमड़ी है, जिससे बाजार में खूब चहल-पहल दिखाई दे रही है। नगर में जगह-जगह मिट्टी के दिए, बिजली की झालर, बर्तन, पोस्टर, धार्मिक चित्र, सजावट के सामान, गिफ्ट व मिठाई की दुकानें सजी हैं। बाजारों में रौनक बढ़ रही है। सुनील कुमार ध्यानी, बलराज बहादुर, निशु, सुभाष, अरुण कुमार, शादाब आलम आदि का कहना है कि इस बार बाजारों मे रौनक है, लेकिन सामान महंगा है। इसलिए कोशिश की जा रही है कि खरीददारी धनतेरस से शुरू होगी।
किस तरह का है फैंसी सामान
-सामान्य मोमबत्ती के अलावा बाजार में फैंसी मोमबत्तियां, मिट्टी के साधारण दियों के साथ फैंसी दिये भी लोगों को खूब भा रहे हैं। मोमबत्ती दिए का आकार लिए है। गणेश और सरस्वती की मूर्ति भी कई तरह के लुक में मिल रही है। इलेक्ट्रानिक लाइटों से तो बाजार हर तरफ भरा पड़ा है।
बजट के अनुकूल सामान
-इस बार हर सामान के दाम पिछली बार से काफी बढ़े हुए हैं, लेकिन उसको आम आदमी की पहुंच तक बनाने के लिए भी उपाय तलाशे गए हैं। बड़ी चांदी की मूर्तियां खरीदी जाती थी, अब उसी दाम पर हलके चांदी के गणेश, सरस्वती आदि की मूर्तियां फैंसी और फ्रेम में उपलब्ध हैं। जो आम आदमी के बजट में फिट बैठ रही है। इसमें भी कई तरह की वैरायटी हैं। अन्य फैंसी सामानों और साधारण सामानों के दामों में अधिक अंतर नहीं है।
कोटद्वार के खरीददारों का कहना है---
- पिछले एक-दो सालों से बाजार में सामान का फैंसी आकार मिल रहा है। सामान खरीदने में भी असमंजस की स्थिति बन रही है। किस को खरीदें और किस को नहीं खरीदें। महंगाई से भी बजट बिगड़ रहा है।
-देवाशीष रावत
- बजट के अनुरूप ही सामान खरीद रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार सामान काफी महंगा है।
अरविंद दुदपुड़ी