कर्णप्रयाग। टी स्टेट के रूप में पहचान रखने वाले बेनीताल क्षेत्र के नजदीकी गांव अब चाय के लिए पहचाने जाएंगे। मृदा परीक्षण में सफल रहने के बाद चाय विकास बोर्ड यहां चाय की खेती शुरू करने जा रहा है। इसके लिए मनरेगा योजना के तहत बोर्ड की ओर से धारकोट, घंडियाल और सिमतोली गांवों में चाय की पौध लगाई जा रही है। मार्च तक 5 हेक्टेयर भूमि पर पौधे लगाने का लक्ष्य है।
बांज, बुरांश और देवदार के घिरे बेनीताल क्षेत्र में अंग्रेजों के शासन में चाय की खेेती की जाती थी, लेकिन आजादी के बाद यहां लोगों ने चाय की खेती बंद कर दी। वर्ष 2016 में तत्कालीन सरकार में चाय विकास बोर्ड में उपाध्यक्ष रहे भुवन नौटियाल की पहल पर कर्णप्रयाग ब्लाक के 60 से अधिक गांवों में चाय की खेती के लिए मृदा परीक्षण किया गया। इसमें बेनीताल से लगे गांव धारकोट, घंडियाल और सिमतोली गांवों की भूमि चाय की खेती के लिए उपयुक्त पाई गई। चाय विकास बोर्ड नौटी बागान के क्षेत्रीय अधिकारी केएस गंगोला और सुपरवाइजर अनिल नैथानी ने बताया कि ब्लाक के चयनित गांव धारकोट, घंडियाल और सिमतोली में मनरेगा के तहत चाय की पौध लगानी शुरू कर दी गई है। मार्च माह तक यहां पांच हेक्टेयर भूमि में पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है।
177 हेक्टेयर पर पहुंची चाय की खेती
कर्णप्रयाग। नौटी चाय बागान की ओर से अब जिले के 177 हेक्टेयर पर चाय की खेती की जा रही है। कर्णप्रयाग के धारकोट, घंडियाल, सिमतोली के अलावा बोर्ड ने गैरसैंण के कल्याणा, बाटाधार में चाय की पौध रोपी है। इससे पूर्व चाय विकास बोर्ड की ओर से नौटी, जाख, भटोली, खेती, मालसी, कालीमाटी, जंगलचट्टी सहित धारापानी के 170 हेक्टेयर में चाय की खेती की जा रही है।
चाय फैक्ट्री लगाने की मांग
कर्णप्रयाग। उत्तरांचल चाय बागान वर्कस यूनियन के सदस्यों ने काबीना मंत्री सुबोध उनियाल को ज्ञापन देकर चाय बागान में चाय फैक्ट्री स्थापित करने की मांग की। ज्ञापन में यूनियन के सदस्यों ने चाय बागान के भू-स्वामियों का किराया बढ़ाने, बागान के लिए नई और बंजर खेतों का चयन करने, चाय बागानों के विकास के लिए सरकार की ओर से विशेष पैकेज की व्यवस्था करने की मांग की। ज्ञापन में मजदूरों के दो सालों के बकाया एरियर का भुगतान करने सहित न्यूनतम वेतन 20 हजार और न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड की स्थापना करने की मांग की गई। ज्ञापन में यूनियन के महामंत्री दामोदर प्रसाद, उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र, संरक्षक भुवन नौटियाल सहित कई अन्य के हस्ताक्षर शामिल हैं।