बीते दिनों हुई बारिश से जिले की 53 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे डेढ़ सौ अधिक गांवों में इन दिनों पेयजल की खासी दिक्कत बनी हुई हैं। वहीं कई गांवों में गंदे पानी की सप्लाई की जा रही है।
जल स्रोतों और पेयजल लाइनों के क्षतिग्रस्त होने से पेयजल आपूर्ति बाधित हो गई है। ऐसे में अब ग्रामीण प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर हैं। घाट विकास खंड के चोपड़ागांव निवासी रामानंद और सतेंद्र सिंह का कहना है कि बारिश से गांव के पेयजल लाइन के साथ पैदल रास्ते भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
ऐसे में गांव में प्राकृतिक जल स्रोतों तक जाना भी कठिन हो रहा है।
इधर, जल संस्थान के अधिशासी अभियंता जेपी जोशी का कहना है कि गांवों में लाइनें क्षतिग्रस्त है लेकिन वैकल्पिक रुप से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। लाइनों के सुधारीकरण के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिए गए हैं। वित्तीय स्वीकृति मिलते ही लाइनों का सुधारीकरण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
जिले में क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनें-
मासौं, मसोली, सैकोट, देवर-खडोरा, कौंज, नंदप्रयाग, घुडसाल, घाट, खुनाणा, कांडई, लांखी, चारी, चोपड़ाकोट, कांडा, तारतोली, पाखी, कर्णप्रयाग, देवराड़ा, ढुंगाखोली, डुंग्री, सुनाऊ-देवलग्वाड, कुलसारी, माल, मेल्ठा, कैलधार-देवाल बाजार, सोडिंग, बिसौंणा, पुनगांव, बूंगा, तलवाड़ी, गेरुड़, बूंगा चक गोवरथान, कुराड़, कलियाधार, कंडारीखोड, चौरासैंण, कांडा-मैखुरा, धल, स्वर्का, सेम-रामबोरी, कनखुल, कांडा-मैखुरा तोक, बणसोली, जयकंडी, सूना, तलवाड़ी स्टेट, थराली पिंडरपार, भैंसखान, थराली, पारथा-ढोलापानी, कसबीनगर, डुंग्री, खटरोला, कुमुर रुइसाण।