ब्लाक के भंगोटा गांव में पेयजल निर्माण निगम द्वारा कागजों में पेयजल लाइन निर्माण में अनियमितता बरते जाने का मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों की शिकायत पर जिलाधिकारी की ओर से मामले की जांच एसडीएम थराली को दी गई है।
भंगोटा गांव में वर्ष 2007 से 14 तक पेयजल लाइन निर्माण के तहत विभिन्न चरणों में 42.42 लाख रुपये खर्च किए गए। बावजूद गांव तक पानी नहीं पहुंचा और न लाइन पहुंची। ग्रामीण भूपेंद्र सिंह की ओर से मांगे गए सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत वर्ष 2007-08 में लवकुश-भंगोटा परियोजना के तहत पेयजल लाइन का निर्माण शुरू किया गया, जिसमें पहले चरण में 32.89 लाख की धनराशि व्यय की गई।
यही नहीं वर्ष 2010-11 में 3.213 लाख रुपये की धनराशि व्यय की गई। बावजूद गांव तक पानी नहीं पहुंचा, जिसके बाद वर्ष 2013-14 में भी आपदा के तहत स्वीकृत 6.59 लाख में से 6.322 लाख व्यय किए गए। लेकिन गांव तक पानी नहीं पहुंचा।
भूपेंद्र सिंह ने कहा कि नौ साल में 42.424 लाख खर्च करने के बाद भी विभाग गांव तक लाइन नहीं बिछा पाया है। प्रधान दीपा देवी ने कहा कि विभाग ने लाखों रुपये खर्च किए पर लोगों का पानी नहीं मिल पाया। इसकी जांच की जानी चाहिए।
योजना की सभी पत्रावलियां एसडीएम को भेज दी है। हालांकि तत्कालीन समय पर काम देेख रहे जेई सुशील कुमार का स्थानांतरण अन्यत्र हो गया है। बावजूद जेई को सूचना दी गई है। यदि काम में गड़बड़ी पाई गई, तो संबधित जेई और अन्य दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। -आरसी मिश्रा, अधिशासी अभियंता, पेयजल निर्माण निगम कर्णप्रयाग
योजना संबंधी जानकारी ली गई है। साथ ही योजना की सभी पत्रावलियां भी मंगा दी गई है। एक सप्ताह में संबधित अधिकारियों के साथ पूरी योजना का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। -योगेंद्र सिंह, एसडीएम