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संतान कामना लेकर 350 बरोही पहुंचे अनसूया माता मंदिर

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संतानदायिनी शक्ति शिरोमणि माता अनसूया का दो दिवसीय मेला बुधवार से शुरू हुआ। अनसूया गेट पर जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी ने मेले का शुभारंभ किया। इस दौरान अनसूया गेट पर गांव-गांव से पहुंचीं ध्याणियों ने मांगल गीतों से माता अनसूया का स्वागत किया। संतान कामना लेकर 350 बरोही (निसंतान दंपति) अनसूया माता मंदिर पहुंचे। अलग-अलग गांवों से अनसूया गेट पर पहुंचीं देव डोलियों ने ढोल-दमाऊं की थाप पर नृत्य किया और भक्तों को आशीर्वाद दिया।
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बुधवार को दोपहर दो बजे कठूड़, खल्ला, बणद्वारा, देवलधार और सगर गांव से ज्वाला माता (माता अनसूया की बहिनें) की डोली मंडल बाजार में पहुंचीं। यहां देव डोलियों ने भक्तों को दर्शन दिए। यहां आधा घंटे तक सभी देव डोलियों की पूजा की गई। दूर-दराज के गांवों से पहुंचे दंपतियों और भक्तों ने अपनी आराध्य देवियों के दर्शन कर मनौतियां मांगीं। ध्याणियों ने आराध्य देवी को शृंगार सामग्री भेंटकर अपने कुटुंब-परिवार की कुशलता की कामना की। बृहस्पतिवार को पूजा-अर्चना के बाद सभी देव डोलियां भक्तों को आशीर्वाद देने के बाद अपने-अपने मंदिरों के लिए रवाना होंगी। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी ने कहा कि अनसूया माता मंदिर तक सड़क निर्माण और आस्था पथ का सुधारीकरण कार्य करवाया जाएगा। इस मौके पर पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी, अनसूया मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बीएस झिंक्वाण, भगत सिंह बिष्ट, पूर्व जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र सिंह नेगी, नगर पालिका अध्यक्ष सुरेंद्र लाल, विक्रम बर्तवाल, रघुवीर बिष्ट, पूर्व प्रधान रविंद्र सिंह, अरविंद नेगी, भूपाल सिंह राणा, ब्लॉक प्रमुख विनीता देवी और जोशीमठ प्रमुख हरीश परमार आदि मौजूद थे।
यह है मान्यता
माता अनसूया मंदिर में बरोहियों को मंदिर प्रांगण में बने एक कक्ष में बैठाया जाता है। मान्यता है कि उन्हें यहां सपने में माता अलग-अलग रूपों में दर्शन देती हैं, जिस बरोही को माता दर्शन दे देती हैं, वह चुपके से उठकर मुख्य मंदिर में पूजा के लिए पहुंच जाती है। मान्यता है कि जिस भी बरोही के स्वप्न में कन्या आएगी, तो उसे शुभ माना जाता है।
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