फूलों की घाटी में पॉलीगोनम हटाने में लगे मजदूर।
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फूलों की घाटी पर्यटकों की राह ताक रही है। हिमाच्छादित पर्वतों के बीच स्थित फूलों की घाटी में विभिन्न प्रजाति के लगभग 300 फूल खिले हुए हैं, जो दूर-दूर तक अपनी महक बिखेर रहे हैं।
कोरोना संकट के चलते अभी तक सरकार की ओर से फूलों की घाटी में पर्यटकों की आवाजाही के लिए कोई गाइड लाइन तैयार नहीं की गई है, जिससे घाटी में सन्नाटा पसरा हुआ है। गोविंदघाट से 16 किमी की पैदल दूूरी तय कर पर्यटक फूलों की घाटी में पहुंचते हैं। फूलों की घाटी भ्रमण के लिए जुलाई, अगस्त व सितंबर के महीनों को सर्वोत्तम माना जाता है। सितंबर में यहां ब्रह्मकमल खिलते हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। फूलों की घाटी के वन क्षेत्राधिकारी वृजमोहन भारती ने बताया कि घाटी में फूलों की लगभग 500 प्रजातियां खिलती हैं। मौजूदा समय में यहां करीब 300 फूलों की प्रजाति खिली हुई हैं। फूलों की घाटी में अभी पर्यटकों की आवाजाही पूर्ण रुप से प्रतिबंधित है।
फूलों की घाटी में पॉलीगोनम हटाने का काम शुरू
जोशीमठ। फूलों की घाटी में नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन ने फूलों के दुश्मन पॉलीगोनम को हटाने का काम शुरू कर दिया है। घाटी में जगह-जगह पॉलीगोनम के पौधों की संख्या बढ़ने लगी है। प्रतिवर्ष नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन की ओर से मजदूरों के जरिए पॉलीगोनम का उन्मूलन किया जाता है। फूलों की घाटी एक जून को पर्यटकों के लिए खोल दी गई थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते इस बार घाटी में पर्यटक नहीं पहुंच पाए। वन क्षेत्राधिकारी वृजमोहन भारती का कहना है कि घाटी के निरीक्षण के लिए एक सप्ताह पूर्व छह सदस्यीय दल भेजा गया था। दल ने बताया कि घाटी में फूलों के साथ ही पॉलीगोनम भी तेजी से पनप रहा है। पॉलीगोनम एक प्रकार का खरपतवार है, जो फूलों को पनपने नहीं देता है। इसके उन्मूलन के लिए घाटी में दस मजदूरों को लगाया गया है।