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बिसौंणा गांव में 28 मवेशी जिंदा दफन

Fri, 03 Jun 2016 08:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कर्णप्रयाग
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आदिबदरी तहसील के बिसौण बाजार में बादल फटने से आया मलबा। - फोटो : Amar Ujala
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 आदिबदरी तहसील के बिसौंणा गांव में बृहस्पतिवार रात को बारिश ने भारी तबाही मचाई। गांव के ऊपर पहाड़ी पर हुए वज्रपात से पानी और मलबा गांव में जा घुसा, जिससे आठ गोशालाएं और तीन मकान क्षतिग्रस्त हो गए। 28 से अधिक मवेशी जिंदा दफन हो गए।
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सैकड़ों नाली कृषि भूमि के साथ गांव की पेयजल और विद्युत लाइनें बारिश की भेंट चढ़ गई। वहीं सड़क और संपर्क मार्ग भी जगह-जगह बंद हो गए। प्राइमरी स्कूल का एक हिस्सा भी आपदा की भेंट चढ़ गया। ग्रामीणों ने बताया कि पहाड़ी से आए मलबे के सैलाब से रतन सिंह, सुंदर सिंह, बलवंत सिंह, महिपाल सिंह, नारायण सिंह, रेवत सिंह, पुष्कर सिंह और सतीश सिंह की गोशाला क्षतिग्रस्त हो गई।

जबकि 20 बकरियों सहित 28 मवेशी मलबे में दब गए। शुक्रवार को ग्रामीण दो गायों और दो बैलों सहित चार मवेशियों के शव मलबे से निकाल पाए। यही नहीं मलबे से विक्रम सिंह, कल्याण सिंह और राजे सिंह के आवासीय घर भी तबाह हो गए और घर से अंदर पानी तथा मलबा घुस गया।
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ग्रामीणों ने किसी तरह जान बचाई। डर से पूरी रात लोगों ने जाग कर काटी। गांव का प्राइमरी स्कूल भी बारिश और मलबे से क्षतिग्रस्त हो गया। प्रभारी तहसीलदार सुशीला कोठियाल, राजस्व उपनिरीक्षक दलबीर चौहान आदि ने शुक्रवार को गांव पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया।

डिप्टी स्पीकर पंहुचे बिसौंणा
कर्णप्रयाग। डिप्टी स्पीकर डा. अनुसूया प्रसाद मैखुरी शुक्रवार को बिसौंणा गांव में हुए नुकसान का जायजा लेने पहुंचे। डा. मैखुरी ने कहा कि क्षतिग्रस्त पेयजल, विद्युत लाइनों की मरम्मत के लिए अधिकारियों को कहा गया है। साथ ही क्षतिग्रस्त सड़क को खोलने के लिए लोनिवि के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। प्रभावितों की हरसंभव मदद की जाएगी। इस दौरान गौचर नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश नेगी, प्रधान गीता देवी, हरेंद्र चौधरी, सुभाष रावत, सुभाष चमोली आदि मौजूद थे।

बरतोली पहुंची राजस्व विभाग की टीम
गौचर। राजस्व विभाग की टीम ने शुक्रवार को कर्णप्रयाग ब्लाक के बरतोली गांव में बारिश से हुए नुकसान का जायजा लिया। क्षेत्र के राजस्व उपनिरीक्षक जगदीश ओलिया ने बताया कि एक दर्जन से अधिक किसानों की 10 नाली से अधिक कृषि भूमि मलबे से क्षतिग्रस्त हुई है, जबकि अन्य घरों में भी पानी आया था। बताया कि रात्रि का मामला होने से कुछ परिवार सुरक्षित स्थानों पर गए थे। जो शुक्रवार को अपने घरों में लौट आए हैं। कहा कि हालांकि गांव में भारी मात्रा में बारिश का पानी आया लेकिन जनहानि या अन्य नुकसान नहीं है।

रुद्रप्रयाग में अतिवृष्टि ने मचाई तबाही
 रानीगढ़ पट्टी के कोट तल्ला गांव और भैरव गदेरे के ऊपर बृहस्पतिवार देर शाम अतिवृष्टि से कोट तल्ला, ग्वाड़ कोदिमा और जसोली गांव में कई नाली भूमि फसल सहित नष्ट हो गई। गांव के पैदल रास्ते, पेयजल स्रोत और पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कई गोशालाओं में पानी भर गया है।

शाम को करीब पौने सात बजे तेज बारिश के साथ कोट तल्ला और भरैव गदेरे के ऊपर एक साथ बादल फटने से गदेरे में पानी और भारी मलबा सैलाब के साथ बहने लगा। इससे  कोट तल्ला गांव में कई गोशालाओं में पानी भर गया। कई नाली भूमि कटाव व बहाव से नष्ट हो गई।

सैकड़ों खेतों में पानी भरने से धान की फसल बर्बाद हो गई है। पर्यावरणविद् व स्थानीय ग्रामीण जगत सिंह जंगली, राघवेंद्र सिंह, प्रीतम सिंह, विनय प्रसाद जसोला आदि ने बताया कि अतिवृष्टि से गांवों के पैदल रास्ते कई स्थानों पर ध्वस्त हो गए हैं। प्

राकृतिक पेयजल स्रोतों के साथ जलसंस्थान और जल निगम की पेयजल लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। क्षेत्र को जोड़ने वाला एकमात्र जसोली-कोट मार्ग पर कई स्थानों पर मलबा जमा होने से यातायात ठप हो गया है। शुक्रवार को गांवों में ग्रामीण दिनभर सुरक्षा इंतजामों में जुटे रहे। दूसरी तरफ ग्राम पंचायत कोठगी-भटवाड़ी में बारिश से सड़क का मलबा खेतों में घुसने से कई नाली खेती नष्ट हो गई।

बाल-बाल बचा युवक
रुद्रप्रयाग। भैरव गदेरे के उफान में कोट तल्ला निवासी अरुण सिंह  पुत्र स्व. रघुनाथ सिंह मोटर साइकिल सहित बह गया था। हालांकि पानी के तेज बहाव से वह किनारे लग गया, जिससे उसकी जान बच गई। घायल अवस्था में घर पहुंचने पर उसने परिजनों को घटना के बारे में जानकारी दी। इधर, शुक्रवार को ग्रामीणों द्वारा गदेेरे से क्षतिग्रस्त बाइक निकाली गई।

पेयजल सप्लाई ठप
रुद्रप्रयाग। बृहस्पतिवार को हुई मूसलाधार बारिश से रुद्रप्रयाग नगर की पेयजल सप्लाई ठप हो गई है। शुक्रवार को जलसंस्थान की ओर से सप्लाई बहाल करने के प्रयास किए गए। हालांकि कुछ ही घरों में पानी की सप्लाई हो गई। वहां भी गंदीला पानी आ रहा है।

गदेरे उफान पर, लोग रतजगा के लिए मजबूर
रुद्रप्रयाग। पुनाड़ और तून गदेरे दो दिन से नगरवासियों को डरा रहे हैं। मिट्टी और मलबे के साथ गदेरों का जलस्तर बढ़ा होने से निकटवर्ती घरों और दुकानों को खतरा बना हुआ है। नगर क्षेत्र को पेयजल आपूर्ति करने वाला पुनाड़ गदेरा बरसात में लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।

बृहस्पतिवार शाम को हुई मूसलाधार बारिश के बाद से गदेरे का उफान चरम पर है। ऐसे में डांगसेरा, हितडांग और बाजार के लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। तुन गदेरा का विकराल रूप ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। जयमंडी गांव के समीप से बह रहे गदेरे से मलबा व पानी राजमार्ग पर पहुंचने से कई दुकानों में बरसाती पानी घुसने का डर बना है। गदेरे के बहाव से गांव का पैदल मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गया है।

यहीं नहीं गांव के नीचे भूमि कटाव होने से भू-धंसाव का खतरा भी पैदा हो रहा है। इधर, नगर पालिका अध्यक्ष राकेश नौटियाल ने बताया कि गदेरों की स्थिति को देखते हुए निकटवर्ती स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से सुरक्षा दीवारों का निर्माण किया जाएगा।

एक मकान ध्वस्त, 17 आंशिक क्षतिग्रस्त
पौड़ी। अतिवृष्टि से थलीसैंण विकासखंड के कई गांवों में भारी नुकसान हुआ है। एक मकान पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है जबकि 17 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। सिंचाई गूल, पेयजल लाइन और गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त हो गईं। 2.956 हेक्टेयर कृषि भूमि में मलबा आ गया है। तीन पैदल पुलिया बहने से लोगों को आवाजाही में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। खिर्सू से आगे जगह-जगह पत्थर और मलबा आने से रास्ता अवरुद्ध हो गया है।
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