गोपेश्वर। पर्वतीय क्षेत्रों में ट्राउट मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए बैरागना (चमोली) में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के अंतिम दिन डीएम ने प्रतिभागी काश्तकारों को मत्स्य बीज और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। डीएम स्वाति एस भदौरिया ने काश्तकारों को ट्राउट फार्मिंग के लिए प्रोत्साहित करते हुए हरसंभव मदद देने की बात कही। प्रशिक्षण में रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बोगेश्वर, पिथौरागढ़, टिहरी तथा चमोली के काश्तकारों ने भाग लिया।
डीएम ने कहा कि पर्वतीय जिलों में ट्राउट प्रजाति की मछली पालन के लिए अच्छा वातावरण होने के कारण अपार संभावनाएं हैं। ट्राउट मछली की बाजार में मांग है। इससे जुड़कर काश्तकार अपनी आर्थिकी को मजबूत बना सकते हैं। मत्स्य पालन विभाग के उप निदेशक (नियोजन) एसके पुरोहित ने कहा कि चमोली के बिरही गंगा, बालखिला, नंदाकिनी, भागीरथी, टोंस, यमुना, धौली और गौरी गंगा में मछली उत्पादन किया जा सकता है। इस मौके पर उप निदेशक पौड़ी जीसी रावत, पूर्व ब्लाक प्रमुख दशोली भगत सिंह बिष्ट, प्रभारी सहायक निदेशक मत्स्य जगदंबा कुमार, मत्स्य के जनपद प्रभारी अभिषेक मिश्रा, रमेश सिंह, मनोज सिंह, आमोद नौटियाल, सुरेश जोशी, प्रदीप बुटोला, नील क्रांति फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट और देवभूमि मत्स्य पालन सहकारी समिति के अध्यक्ष खरक सिंह आदि मौजूद थे।