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राजधानी संघर्ष समिति की बैठक में आंदोलनकारियों ने किया प्रस्ताव पास, 3

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गैरसैंण। रामलीला मैदान गैरसैंण में आयोजित बैठक में आंदोलनकारियों ने कहा कि वे 10 जुलाई को कोर्ट में जमानत नहीं करायेंगे, चाहे उनको जेल ही क्यों न जाना पड़े। कहा कि जब तक राजधानी गैरसैंण में नहीं बनाई जायेगी तब तक वे चुप बैठने वाले नहीं हैं।
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रविवार को राजधानी संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में आंदोलनकारियों ने प्रस्ताव पास करते हुए कहा कि जन संघर्षों के बाद राज्य बना है। गैरसैंण राजधानी के लिए जनता ने कई आंदोलन किये, लेकिन सरकार गैरसैंण को राजधानी नहीं बना रही है। कहा कि वे गैरसैंण को राज्य की स्थाई राजधानी बनाकर ही दम लेंगे, चाहे उनको जेल की सलाखों के पीछे ही क्यों न जाना पड़े। बैठक में पहुंचे आंदोलनकारियों ने कहा कि जल्दी ही पूरे प्रदेश में जेल भरो आंदोलन चलाया जायेगा। आंदोलनकारियों ने संचालन समिति का गठन कर पूर्व राज्य मंत्री सुरेश बिष्ट, नगर पंचायत गैरसैंण के अध्यक्ष पुष्कर रावत, बीरा देवी, बिमला देवी और दर्शन मढवाल को नामित किया गया है। बैठक में वक्तओं ने जिला विकास प्राधिकरण का भी विरोध किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता केएस बिष्ट के संचालन में रुद्रप्रयाग से रमेश दत नौटियाल, सत्यपाल नेगी, राजे सिंह बिष्ट, पुरूषोत्तम चंद्रवाल, प्यारी देवी बिष्ट, ब्लॉक प्रमुख सुमति बिष्ट, पूरन नेगी, कमला पंवार, सरोज शाह, जसवंत बिष्ट, धनीराम, काशी देवी, कृष्णा नेगी, हंसी, गोविंदी, गुडी, चैनादेवी, उमा, मंजू आदि आंदोलनकारियों ने विचार व्यक्त किये।
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गैरसैंण को स्थायी राजधानी की मांग को लेकर करीब दो साल पहले भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान कर्णप्रयाग-नैनीताल हाईवे जाम करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने सहित अन्य धाराओं में 38 आंदोलनकारियों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस द्वारा आरोप पत्र भेजने के बाद वर्तमान में मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट गैरसैंण की अदालत में विचाराधीन है। मामले में अगली सुनवाई 10 जुलाई को है और कोर्ट से चार आंदोलनकारियों को जमानती वारंट भी जारी हो चुके हैं।
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