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वीरान पड़े कस्तूरा मृग प्रजनन केंद्र के दिन बहुरने की आस जगी

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गोपेश्वर। केदारनाथ वन क्षेत्र में आठ साल बाद कस्तूरा मृग दिखा है। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग की ओर से मद्महेश्वर घाटी में लगाए गए ट्रेप कैमरों में दो कस्तूरा मृग जंगल में विचरण करते दिखाई दिए हैं। वन अधिकारी अब कांचुलाखर्क क्षेत्र में भी कस्तूरा मृग होने की संभावना जता रहे हैं। कांचुलाखर्च क्षेत्र में स्थापित किए गए तीन ट्रेप कैमरे वन विभाग की ओर से जुलाई माह में निकाले जाएंगे।
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कस्तूरा मृग के दीदार होने से अब तुंगनाथ क्षेत्र के कांचुलाखर्क में वीरान पड़े कस्तूरा मृग प्रजनन केंद्र के दिन बहुरने की उम्मीद जगी है। कस्तूरा मृग संरक्षण को लेकर वर्ष 1982 में आठ करोड़ की लागत से यह केंद्र स्थापित किया गया था। केंद्र में शुरुआती दौर में 34 कस्तूरा मृगों का झुंड था, लेकिन वर्ष 1986 से यहां कस्तूरा मृगों के मरने का सिलसिला शुरू हो गया। और तीन दशक में 61 कस्तूरा मृग मौत के मुंह में समा गए। वर्ष 2010 के दिसंबर माह में यहां एकमात्र पल्लवी नाम की कस्तूरा मृग भी दुनिया से चल बसी। इसके बाद से कस्तूरा मृग प्रजनन केंद्र वीरान पड़ा हुआ था। वर्ष 2010 के बाद से इस क्षेत्र में एक भी कस्तूरा मृग ट्रैप कैमरे में कैद नहीं हुआ था। अब मद्महेश्वर घाटी में दो कस्तूरा मृग विचरण करते दिखाई दिए हैं। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ अमित कंवर का कहना है कि आठ साल बाद फिर केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग में कस्तूरा मृग विचरण करते दिखे हैं। यह शुभ संकेत है। कांचुलाखर्क क्षेत्र में भी कस्तूरा मृग होने की उम्मीद है। यहां के कैमरे जुलाई माह में निकाले जाएंगे। कस्तूरा मृगों का संरक्षण किया जाएगा।
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