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सैकोट गांव में नहर के क्षतिग्रस्त होने से दो गौशाला क्षतिग्रस्त

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गोपेश्वर। दशोली ब्लॉक के सैकोट गांव में सिंचाई नहर के सुधारीकरण के बाद इस पर पानी चलाया गया तो नहर का पांच मीटर हिस्सा ही क्षतिग्रस्त हो गया। साथ ही क्षतिग्रस्त नहर का मलबा गोशाला में जा रहा जिससे दो मवेशियों की मौत हो गई और मलबे से कोठियालसैंण-नंदप्रयाग सड़क दो घंटे तक बंद रही। बाद में लोनिवि की ओर से मलबा हटाकर सड़क पर आवाजाही सुचारु कराई गई। ग्रामीणों ने कहा कि नहर के क्षतिग्रस्त होने से विभागीय अधिकारियों की कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खडे़ हो गए हैं। वहीं विभाग इसे ग्रामीणों की लापरवाही बता रहा है।
सैकोट गांव के खेतों में सिंचाई के लिए सिंचाई विभाग की ओर से नहर का निर्माण किया गया था जो रख-रखाव के अभाव में क्षतिग्रस्त हो गई थी। ऐसे में बीते मार्च माह में ग्रामीणों की मांग पर सिंचाई विभाग ने 46 लाख की धनराशि खर्च कर नहर का सुधारीकरण किया। शनिवार को सुबह करीब 11 बजे गांव के मालधार तोक में नहर पर पानी खोला गया तो नहर का करीब पांच मीटर हिस्सा टूट गया और पानी के साथ मलबा यहां निचले हिस्से में बनी राजेंद्र प्रसाद सती और सुबोध सती की गोशाला में घुस गया। इससे गोशाला क्षतिग्रस्त हो गई और यहां बंधी दो जरसी गाय की मौत हो गई। पानी के साथ टनों मलबा कोठियालसैंण-नंदप्रयाग सड़क पर आने से सड़क बंद हो गई, जिससे यहां करीब दो घंटे तक वाहनों की आवाजाही ठप पड़ी रही। सूचना पर पहुंची लोनिवि की टीम ने मलबा हटाकर सड़क पर आवाजाही सुचारु कराई। राजेंद्र और सुबोध ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य निमभन गुणवत्ता का होने के कारण नहर का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ।
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कोट
सैकोट गांव में ग्रामीणों ने नहर का पानी खेतों में लगाने के लिए पानी रोक दिया था जिससे नहर पर दबाव पड़ा और नहर क्षतिग्रस्त हो गई। इसके निरीक्षण के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में विभाग की ओर से मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है। - बीएस यादव, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग चमोली।
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