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सतोपंथ के दीदार को तीर्थयात्रियों को इस वर्ष करना होगा थोडा और इंतजार

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जोशीमठ। सतोपंथ झील के पास अभी भारी मात्रा में हिमखंड हैं। ऐसे में बाहरी क्षेत्र से आने वाले तीर्थयात्रियों को यहां के दीदार के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। खतरे के रास्ते पार कर शनिवार को छह सदस्यीय दल सतोपंथ की यात्रा कर सकुशल बदरीनाथ लौटा और अपने अनुभव साझा किए। दल ने सतोपंथ में तिरंगा भी फहराया।
समुद्र तल से 4600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सतोपंथ झील देश के अंतिम गांव माणा से 19 किमी की दूरी पर स्थित है। सतोपंथ ताल अपनी खूबसूरती के लिए विश्वभर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। स्थानीय युवाओं का छह सदस्यीय दल बृहस्पतिवार को बदरीनाथ से सतोपंथ के लिए रवाना हुआ था। खतरे भरे रास्तों को पार कर दो दिनों की यात्रा के बाद शनिवार को दल सतोपंथ से बदरीनाथ धाम लौट आया है। दल के एक सदस्य हर्षवर्द्धन का कहना है कि सतोपंथ झील अभी भी पूरी तरह से बर्फ से ढकी है। है। झील के एक कोने से बर्फ को हटाकर उन्होंने स्नान किया। उन्होंने बताया कि चक्रतीर्थ से सतोपंथ तक 20 से 25 स्थानों पर हिमखंड पसरे हैं। जहां पर बर्फ के ऊपर से आवाजाही करनी पड़ रही है।
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इंसेट
तीकोना है सतोपंथ का आकार
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने सतोपंथ झील के तीन कोनों पर साधना की थी। इस कारण सतोपंथ झील का आकार तिकोना है। हिंदू धर्मावलंबियों के लिए यह स्थान किसी तीर्थ से कम नहीं है।
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