थराली। मध्य पिंडर रेंज थराली के जंगल लगातार दो दिनों से जल रहे हैं। अब तक दो सौ हेक्टेयर से अधिक जंगल राख हो चुके हैं। वन विभाग की टीम आग बुझाने में जुटी हुई है, लेकिन हवा से आग ज्यादा भड़क रही है।
बुधवार को थराली के चेपड़ों, टुंड्री, उणी, गोठिंडा, कोठी सहित कई अन्य क्षेत्रों में लगी आग से भारी नुकसान हुआ है। भीषण आग में उणी और कोठी के बीच चीड़ के कई फीट ऊंचे पेड खड़े-खड़े जल गये। साथ ही बहुमूल्य वनौषधि भी राख हो गई । चेपड़ों के खाड़ीबगड़ और उणी से फैली आग के बीच कई जंगली जानवर भी जल चुके हैं। पूरे वातावरण में धुआं फैलने से क्षेत्र में धुंध छाई है। उणी के पास बनी अलकनन्दा वन विभाग की नर्सरी को कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने मुश्किल से बचाया। धरा गांव में भी तमाम पेड़-पौधे जल गये। बंदरढोल और जूनीधार के जंगल भी आग की चपेट में हैं। चुकीबन्दरढोन की चट्टान पर 10 से 15 मृगों को भी खतरा बना है। वन विभाग के रेंजर गोपाल सिंह बिष्ट का कहना है कि हम आग बुझाने में लगे हैं। जल्दी ही आग पर काबू पा लिया जायेगा।
गोशाला को कर गई राख
थराली । बृहस्पतिवार को जूनिधार गांव में जंगल की आग से एक गोशाला जलने के कारण चार पशु जिंदा जल गये। ग्रामीणों ने मुश्किल से आग को गांव में आने से रोका। गोशाला गांव से कुछ दूरी पर थी। ग्रामीणों ने आग लगाने वालों को पकड़ने और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। थराली के राजस्व निरीक्षक राजकुमार सिद्दवान ने बताया कि गुरुवार को दोपहर लगी आग से दिमती देवी पत्नी हयात राम से दो बैल, एक कुत्ता जल कर मर गये हैं और एक गाय अधजली अवस्था में है। कुंदन राम की गोशाला भी आग की चपेट में आई है। वहां ग्रामीणों ने आग बुझा दी । ग्रामीणों ने कहा कि आग गांव की तरफ आने को थी, ग्रामीणों ने तत्परता दिखाकर चीड़ की पत्तियां हटाई और आग को गांव में आने से रोका।