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ऐसे में कैसे पढ़ेगी बेटी कैसे बढ़ेगी बेटी

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गोपेश्वर। एक विद्यालय के अजीबोगरीब नियम के कारण एक छात्रा को परीक्षा देने से रोक दिया गया। इस कालेज में सगाई या शादी होने के बाद छात्रा को विद्यालय आने की अनुमति नहीं है। इसी नियम के चलते शादी के बाद इंटर की छात्रा को कालेज में प्रवेश से रोक दिया गया और अब उपस्थिति पूरी न होने की बात करके उसके परीक्षा देने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। छात्रा की शिकायत पर जिलाधिकारी ने मामले में मुख्य शिक्षा अधिकारी को तत्काल मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
भले ही देश में बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ की बात हो रही हो, लेकिन चमोली जिले में कालेज के अजीबोगरीब नियम ने छात्रा को पढ़ाई छोड़ने को मजबूर कर दिया। राज्य में इन दिनों उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं। चमोली जिले के विकासखंड घाट के पैरी गांव की मंजू देवी राजकीय इंटर कालेज सितैल में इंटर की छात्रा है। उसकी गत 13 दिसंबर को शादी हो चुकी है। वह विवाह के बाद भी अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती थी, लेकिन विद्यालय के प्रधानाचार्य ने उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति देने से महज इसलिए इनकार कर दिया कि उसकी शादी हो चुकी है। प्रधानाचार्य दिगंबर सिंह नेगी ने का कहना था कि छात्रा की विद्यालय में उपस्थिति 75 फीसदी से कम है। यही नहीं प्रधानाचार्य ने यह भी बताया कि विद्यालय के शिक्षक-अभिभावक संघ की ओर से निर्णय लिया गया है कि सगाई और शादी के बाद किसी छात्रा को विद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। छात्रा मंजू ने प्रधानाचार्य पर जानबूझकर परीक्षा में नहीं बैठने देने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया से शिकायत की। जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को तत्काल मामले की जांच कर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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कोट-------
एक ओर सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वहीं सरकार का ही शिक्षा विभाग एक छात्रा को आगे बढ़ने से रोक रहा है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
-दर्शन सिंह, सदस्य, जिला पंचायत, घाट
कोट------
छात्रा को परीक्षा में न बैठने देने का प्रकरण प्रकाश में आया है। विद्यालय के प्रधानाचार्य से स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो कार्रवाई की जाएगी।
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-एलएम चमोला, सीईओ, चमोली

कोट--------
मैं राइंका सितैल में इंटरमीडिएट की छात्रा हूं। मेरी शादी 13 दिसंबर 20018 को हुई। मैं अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हूं, लेकिन विवाह के बाद प्रधानाचार्य ने उसे विद्यालय में आने से मना कर दिया। विवाह के लिए विद्यालय में प्रार्थनापत्र दिया था, लेकिन इसके बावजूद परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया।
-मंजू देवी, छात्रा, राइंका सितैल, चमोली
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